
पाकिस्तान की ओर से अमेरिका-ईरान में युद्धविराम का प्रयास। ( फोटो: AI)
High-Stakes Diplomacy : दुनिया इस समय तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़ी है, लेकिन इस बीच शांति की एक उम्मीद पाकिस्तान से किरण बन कर उभरी है (High-Stakes Diplomacy)। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत की संभावनाओं ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। 24 मार्च 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने दोनों कट्टर दुश्मनों को एक मेज पर लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पिछले 48 घंटों में वाशिंगटन और तेहरान के साथ लगातार संपर्क साधा है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी भौगोलिक और धार्मिक स्थिति का लाभ उठा कर दोनों देशों के बीच एक 'सेफ पैसेज' (Safe Passage) बनाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने प्रस्ताव दिया है कि इस्लामाबाद एक तटस्थ स्थल के रूप में इस ऐतिहासिक वार्ता की मेजबानी कर सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संभावित बैठक के लिए अपनी सबसे मजबूत टीम—उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और जेरेड कुशनर को तैयार रहने को कहा है। ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ "रचनात्मक" बातचीत चल रही है और युद्ध को टालने के लिए वे पांच दिनों तक हमलों को रोकने के लिए तैयार हैं। ट्रंप "शक्ति के माध्यम से शांति" (Peace Through Strength) की अपनी नीति पर चलते हुए ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रहने की शर्त पर एक बड़ी डील ऑफर कर रहे हैं।
हालांकि, दूसरी ओर ईरान के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं। तेहरान ने आधिकारिक तौर पर किसी भी सीधी वार्ता से इनकार किया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका और इजराइल उनके वैज्ञानिकों और सैन्य ठिकानों पर हमले बंद नहीं करते, तब तक कोई भी समझौता मुमकिन नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय का मानना है कि ट्रंप के बयान केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का एक तरीका हैं।
यदि इस्लामाबाद में यह बैठक सफल होती है, तो यह सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। इससे न केवल इजराइल और ईरान के बीच का तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की आसमान छूती कीमतों में भी गिरावट आएगी। मिस्र और तुर्की जैसे देश भी इस पहल का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल सबकी नजरें इस्लामाबाद के 'ग्रीन जोन' पर टिकी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान का यह कदम साहसिक है, लेकिन जोखिम भरा भी है। अगर वार्ता विफल होती है, तो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख पर असर पड़ सकता है, लेकिन सफलता उसे 'ग्लोबल पीसमेकर' बना देगी। अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचता है, तो ईरान पर वैश्विक दबाव काफी बढ़ जाएगा। उधर चीन और रूस भी इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं। वे नहीं चाहेंगे कि अमेरिका अकेले इस क्षेत्र में शांति का क्रेडिट ले जाए।
संबंधित विषय:
Published on:
24 Mar 2026 05:35 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
