
पाकिस्तान में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर धरना-प्रदर्शन (इमेज सोर्स: ANI)
Democratic Rights in Pakistan: पाकिस्तान में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े गए हैं। इस बार आरोप खुद वहां की विपक्षी नेताओं ने लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने ही देश के एक हिस्से यानी कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जाने से रोक दिया गया। इतना ही नहीं, कुछ नेताओं ने दावा किया कि पहले उन्हें आतंकवादी तक कहा गया था। उन्हें बैन किया गया। बदसलूकी की गई। ऐसे में अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद ‘जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ ने पाकिस्तान सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने का आरोप लगाया है।
‘जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ के मुताबिक, ‘तहरीक तहफ्फुज ऐन पाकिस्तान’ के प्रमुख महमूद खान
अचकजई के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पीओके जा रहा था। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी, राजा नासिर अब्बास, मुस्तफा नवाज खोखर और सलमान अकरम राजा समेत कई नेता शामिल थे। कमेटी का दावा है कि अधिकारियों ने काफिले को कोटली में रोक दिया। उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है।
कमेटी ने कहा कि पहले बुनियादी अधिकारों की मांग पर आतंकवादी बताया गया। फिर भी उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है। उनका मकसद सिर्फ लोगों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा करना है। उन्हें हक दिलाना है। लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते। कमेटी ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
एक तरफ पाकिस्तान में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए विरोध प्रदर्शन हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के क्वेटा शहर में ‘बलूच यकजेहती कमेटी’ के नेताओं डॉ. महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा दिए जाने के खिलाफ लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी सरियाब इलाके में बर्मा होटल के पास जुटे थे। उनका उद्देश्य सजा का विरोध करना और दोनों नेताओं की तुरंत रिहाई की मांग करना था। ANI के रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पुलिस ने इलाके को घेर लिया था। वहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, जेल वैन और वरिष्ठ अधिकारी तैनात हो गए थे। जैसे ही लोगों ने नारेबाजी शुरू की, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। महिलाओं ने गिरफ्तारी का विरोध किया तो उन पर भी कथित तौर पर लाठीचार्ज किया गया। हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए।
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन और तेज हो गया। लोगों ने बशीर चौक पर धरना देकर गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की बिना शर्त रिहाई की मांग की। बाद में विरोध प्रदर्शन ईस्टर्न बाईपास और कंबरानी रोड तक फैल गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। BYC ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी प्रशासन शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहा है। संगठन ने कहा कि सभी गिरफ्तार लोगों की रिहाई तक धरना जारी रहेगा। साथ ही छात्रों, वकीलों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज से आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई।
Published on:
30 Jun 2026 06:22 pm
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