
PoK में विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान घिरा (सोर्स: ANI)
Pakistan Occupied Kashmir Protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षाबलों की कार्रवाई को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। अमेरिका की एक मैगजीन ‘जैकोबिन’ ने रिपोर्ट में कई गंभीर दावे किए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल की हिंसक घटनाएं सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं हैं। बल्कि ये घटनाएं ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की ओर इशारा करती हैं, जहां स्थानीय लोगों को अपना ही हक नहीं मिल रहा है। उन्हें जरूरी चीजों से भी वंचित किया जा रहा है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल हैं।
‘Jacobin’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भले ही राजनीतिक रूप से स्वायत्त क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता हो, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। रिपोर्ट का दावा है कि चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप, विशेषकर आरक्षित सीटों के जरिए, इस्लामाबाद समर्थक सरकारों को स्थापित किया जाता है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्थानीय प्रशासन के प्रमुख फैसलों पर अंतिम नियंत्रण पाकिस्तान की संघीय सरकार और अन्य केंद्रीय संस्थाओं का रहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, PoK में 5 जून से विरोध प्रदर्शन जारी हैं और समय के साथ इनमें तेजी आई है। दावा किया गया है कि पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विरोध बढ़ने के बाद पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने व्यापक कार्रवाई की, जिसमें 50 से अधिक लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि वास्तविक मृतकों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली दरों में वृद्धि, ईंधन की बढ़ती कीमतें, महंगाई और गिरते जीवन स्तर ने लोगों में असंतोष बढ़ाया। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि मौजूदा आंदोलन की जड़ें केवल आर्थिक समस्याओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक और प्रशासनिक शिकायतों से भी जुड़ी हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 'जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) की प्रमुख मांगों पर स्थानीय प्रशासन कोई ठोस समाधान नहीं दे सका, जिससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।
रिपोर्ट का यह भी दावा है कि नागरिकों पर कार्रवाई ने पाकिस्तान के उस दावे पर सवाल खड़े किए हैं, जिसमें वह खुद को कश्मीरी लोगों के हितों का समर्थक बताता है।
Updated on:
02 Aug 2026 05:06 pm
Published on:
02 Aug 2026 05:06 pm
