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पाकिस्तानः PM और सेना प्रमुख को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग, पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश

Pakistan sought Nobel Peace Prize: पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर दो सप्ताह के युद्धविराम में मदद की। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उप-प्रधानमंत्री इशाक डार की कूटनीतिक कोशिशों के लिए पंजाब विधानसभा ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन का प्रस्ताव पेश किया। मध्य-पूर्व संकट और पाकिस्तान की भूमिका की पूरी जानकारी पढ़ें।

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Shehbaz Sharif

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। (फोटो- IANS)

Nobel Peace Prize nomination: ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी युद्धविराम की कोशिशों में जुटा पाकिस्तान अब अपने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उप-प्रधानमंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने की कोशिश में जुट गया है। दरअसल, इसके लिए पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा में बाकायदा प्रस्ताव पेश किया गया।

इस प्रस्ताव में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उप-प्रधानमंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की मांग की गई है। स्थानीय जियो न्यूज के मुताबिक, PML-N के मुख्य सचेतक राणा मोहम्मद अरशद द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव में मध्य-पूर्व संकट के मद्देनजर तीनों नेताओं की प्रभावी कूटनीति की प्रशंसा की गई है और कहा गया है कि उनके प्रयासों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त किया है।

क्या कहा गया है प्रस्ताव में?

मध्य-पूर्व तनाव पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि तेहरान के साथ निर्धारित समय में किसी समझौते पर नहीं पहुंचा गया, तो ईरान पर जबरदस्त हमला किया जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान को “पाषाण युग” में पहुंचा दिया जाएगा।

ऐसे में स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति मंगलवार देर रात बनी।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार सभी हितधारकों और वॉशिंगटन के साथ लगातार संपर्क में रहे। उन्होंने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप, इस्लामाबाद की मध्यस्थता से हुए अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बाद पाकिस्तान अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी करने के लिए तैयार है।

मध्य-पूर्व संकट का जिक्र करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि इज़रायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है, जिससे वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसमें आगे कहा गया है कि यह संघर्ष किसी भी क्षण एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल सकता है। ऐसे में प्रस्ताव में मांग की गई है कि प्रधानमंत्री, सेना प्रमुख और उप-प्रधानमंत्री को उनके राजनयिक प्रयासों के सम्मान में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया जाए।

पाकिस्तान ने दखल क्यों दिया?

मध्य-पूर्व में जारी तनाव का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। ऊर्जा संकट के चलते महंगाई चरम पर पहुंच गई है। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसी स्थिति में उसे कुछ क्षेत्रों में स्कूल तक बंद करने पड़े। इसके अलावा, यदि ईरान पर हमले होते, तो ईरानी शरणार्थियों का बोझ भी उठाना पड़ता। ऐसे में यदि जंग और बढ़ती, तो पाकिस्तान की स्थिति और अधिक खराब हो सकती थी।

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