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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी, 12 नागरिकों को उतारा मौत के घाट

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई के दौरान 12 नागरिकों की मौत और ड्रोन हमलों की घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।

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भारत

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Himadri Joshi

Apr 14, 2026

Balochistan

12 बलूचिस्तानी नागरिक मारे गए (फोटो- आईएएनएस)

बलूचिस्तान लंबे समय से अस्थिरता और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है, जहां अलगाववादी गतिविधियां और सैन्य कार्रवाई अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। हाल के दिनों में यहां हिंसा की घटनाओं में तेजी आई है। इसी कड़ी में अब यहां से एक और दुखद खबर सामने आई है। इसके मुताबिक यहां पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई के दौरान कम से कम 12 नागरिक मारे गए है, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह घटना बरखान जिले में हुई, जहां शेलिंग और बमबारी के बाद कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं।

पहले पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हुआ हमला

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले अज्ञात हथियारबंद लोगों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमला किया था, जिसमें 12 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई। इसके बाद सेना ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाया, जो नागरिक इलाकों तक फैल गया। इस कार्रवाई में कई घरों को नुकसान पहुंचा और कुछ वाहनों में आग लगने की भी खबर है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि एक वाहन में मौजूद कई लोगों के शव जल गए, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इन हफ्तों में बढ़े ड्रोन हमले

हाल के हफ्तों में ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। मस्तुंग जिले में एक ड्रोन हमले में एक युवक की मौत हो गई, जबकि कई महिलाएं घायल हो गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक घर को निशाना बनाया गया था, जिसमें अब्दुल समद नामक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। घायलों को क्वेटा में इलाज के लिए भेजा गया है। इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

इस पूरी घटना पर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। बलूच नेताओं ने भी सोशल मीडिया के जरिए विरोध दर्ज कराया है। एक प्रमुख नेता ने कहा, हम इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं और मानते हैं कि निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी सेना को अपने कार्यों पर शर्म आनी चाहिए। लगातार हो रही घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है और भविष्य में और तनाव बढ़ सकता है।