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पाकिस्तानी राष्ट्रपति भारत के खिलाफ गए थे जहर उगलने, देखते ही देखते लगे ‘गो-बैक’ के नारे

पाकिस्तान में सियासी भूचाल: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी संसद को संबोधित करने पहुंचे तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सांसदों ने ‘गो जरदारी गो’ और ‘खान को रिहा करो’ के नारे लगाए।

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भारत

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Saurabh Mall

Mar 03, 2026

pakistan news

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (इमेज सोर्स: आईएएनएस)

Pakistan News: पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल मची हुई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जब राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी संसद में भाषण देने पहुंचे, तो माहौल अचानक गरमा गया। जरदारी भारत पर जमकर आरोप लगा रहे थे, लेकिन उनके ही सांसदों ने उन्हें घेर लिया और ‘गो जरदारी गो’ और ‘खान को रिहा करो’ के नारे गूंजने लगे।

अफगानिस्तान से चल रहे तनाव, ईरान के प्रति अस्पष्ट नीति और देश के अंदरूनी संकटों के बीच यह घटना पाकिस्तान की गहराती राजनीतिक अव्यवस्था को साफ दिखाती है। राष्ट्रपति जहां अपनी नाकामियों का ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश कर रहे थे, वहीं विरोध की आवाज़ों ने उन्हें खुद कटघरे में खड़ा कर दिया।

दरअसल, बतौर राष्ट्रपति जरदारी नौवीं बार नेशनल असेंबली के संयुक्त सत्र को संबोधित करने पहुंचे थे। शांति का राग अलापते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोमवार को युद्ध को आखिरी रास्ता बताते हुए भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की। अपनी झूठी तारीफ करते हुए आगे कहा कि पाकिस्तान ने पहले ही भारत और अफगानिस्तान दोनों को अपनी काबिलियत का बस एक छोटा सा हिस्सा ही दिखाया है।

परमाणु शक्ति की गीदड़भभकी दी

राष्ट्रपति जरदारी ने अपने भाषण में दंभ भी दिखाया। उन्होंने परमाणु शक्ति होने का हवाला देते हुए कहा, “पाकिस्तान एक ज़िम्मेदार परमाणु संपन्न देश है और हम अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझते हैं। जरूरत पड़ने पर हम अपना बचाव करना भी जानते हैं।”

लेकिन उनकी बातें चल ही रही थीं कि दूसरी तरफ विपक्ष लगातार नारेबाजी करता रहा। संसद में ‘गो जरदारी गो’ और ‘खान को रिहा करो’ के नारे गूंजते रहे। विपक्ष, खासकर पीटीआई, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहा था।

इसके अलावा, विपक्ष ने जरदारी पर ट्रम्प द्वारा बनाए गए गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने को लेकर भी सवाल खड़े किए। नारे लग रहे थे- “जाली पीस बोर्ड से बाहर निकलो”। पाकिस्तान की आम जनता पहले से ही फिलिस्तीन मुद्दे पर इजरायल के रुख से नाराज है, ऐसे में इस बोर्ड में शामिल होने पर सरकार के खिलाफ गुस्सा और बढ़ गया।