
epfo pf account
ऐसे कर्मचारी जिन्हें भारतीय कंपनियां तीन वर्ष तक के लिए विदेश (Abroad) में काम पर भेजती है, उन्हें जल्द ही सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के लिहाज से बड़ा लाभ मिलेगा। विदेश भेजे जाने वाले कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा (पेंशन-ग्रेच्यूटी आदि) का पैसा कंपनियों की ओर से भारत में ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े पीएफ खाते (PF Account) में जमा कराना होगा। यानी कंपनियों को उन कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का पैसा संबंधित देशों (विदेश) में जमा नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए भारत सरकार (Indian Government) तमाम देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौता कर रही है। अभी तक केंद्र सरकार 22 देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौता कर चुकी है।
ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, बेल्जियम, कनाडा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, जापान, कोरिया, लक्समबर्ग, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, पुर्तगाल, क्यूबेक, स्वीडन, स्विट्जरलैंड और ग्रेट ब्रिटेन के साथ भारत सरकार ने सामाजिक सुरक्षा समझौता किया है।
भारत-ब्रिटेन के बीच होने जा रहे मुक्त व्यापार समझौते में भी सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को शामिल किया गया है। ब्रिटेन एफटीएफ के तहत सामाजिक सुरक्षा से जुड़े समझौते पर सहमत हो गया है। भारत ने अमरीका के साथ चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) में भी सामाजिक सुरक्षा का प्रस्ताव रखा है।
भारत सरकार उन सभी देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौता करने की दिशा में काम कर रही है, जहां पर भारतीय कंपनियों की मौजूदगी है और भारत से जुड़ी कंपनियां वहां पर भारतीय कर्मचारियों को सीमित अवधि के लिए भेजती हैं। केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया ने कहा कि बाकी देशों के साथ भी सामाजिक सुरक्षा से जुड़े समझौते किए जाएंगे।
सरकार के इस कदम से विदेश जाने वाले श्रमिकों को बड़ा लाभ होगा। अकेले ब्रिटेन में 60,000 भारतीय आइटी प्रोफेशनल काम करते हैं। इनमें से बड़ी संख्या उन कर्मचारियों को है जो भारतीय कंपनियों की ओर से तीन वर्ष या कम अवधि के लिए ब्रिटेन भेजे जाते हैं। अभी जितने दिन कर्मचारी ब्रिटेन में रहते हैं, उनकी सामाजिक सुरक्षा का पैसा वहां की सरकार लेती है। लेकिन अब यह समझौता अमल में आने पर यह धनराशि कर्मचारियों को मिलेगी। इसी तरह से अगर अमरीका के साथ समझौता होता है तो लाखों श्रमिकों को लाभ होगा।
भारत का जिन देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा को लेकर समझौता नहीं है, उन देशों की ओर से भारतीय श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के नाम पर एक निश्चित धनराशि हर महीने काटी जाती है। इस धनराशि की तुलना में उन्हें कोई लाभ नहीं मिलता है। जब कर्मचारी देश वापस लौटते हैं तो यह धनराशि कर्मचारी को वापस नहीं की जाती है।
Updated on:
04 Jul 2025 09:39 am
Published on:
04 Jul 2025 09:23 am
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