
भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर। (फोटो: ANI)
Green Strategic Partnership: भारत और नॉर्वे के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के तहत दोनों देशों के रिश्ते अब एक नए मुकाम पर पहुंच चुके हैं। भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया नॉर्वे दौरे को बेहद 'ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण' करार दिया है। उन्होंने एक विशेष साक्षात्कार में साफ किया कि 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह नॉर्वे यात्रा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि इसके बेहद ठोस और दूरगामी परिणाम निकले हैं। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच लगभग 30 महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर मुहर लगी है। राजदूत स्टेनर ने इस ऐतिहासिक यात्रा के आर्थिक पहलुओं पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ , जिसमें नॉर्वे, आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं, उनके बीच हुआ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता पहले ही अमलीजामा पहन चुका है। इस बड़े व्यापारिक समझौते के अंतर्गत अगले 15 बरसों के अंदर भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करने और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। नॉर्वे अब भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था (जो जल्द ही तीसरी बनने वाली है) के रूप में देख रहा है और अपने घरेलू व्यवसायों को भारत की विकास गाथा का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित कर रहा है।
तकनीक, ऊर्जा और पर्यावरण के मोर्चे पर भी यह साझेदारी बेहद खास है। नॉर्वेजियन राजदूत के मुताबिक, उनके देश की प्रतिष्ठित कंपनी 'इक्वीनोर' ने भारत की 'दीपक फर्टिलाइजर्स' के साथ 15 साल का एलएनजी आपूर्ति समझौता किया है, जिसकी पहली खेप भारत पहुंच भी चुकी है। इसके अलावा, दोनों देश आर्कटिक क्षेत्र में पिघलती बर्फ और भारत के मानसून पैटर्न के बीच के वैज्ञानिक संबंधों पर मिलकर रिसर्च कर रहे हैं। साथ ही, लंबी तटरेखा वाले दोनों देश 'ब्लू इकोनामी' (समुद्री अर्थव्यवस्था) और समुद्री तकनीकी समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
इस खबर पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत होती आर्थिक स्थिति और नॉर्डिक देशों के साथ बढ़ता तालमेल चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने में एक बड़ा गेमचेंजर साबित होगा। यह कूटनीतिक जीत भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन और क्लीन एनर्जी का नया हब बनाएगी। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि EFTA के तहत तय किए गए 100 अरब डॉलर के निवेश का पहला चरण किनक्टर्स (जैसे- सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन या इंफ्रास्ट्रक्चर) में लैंड करता है। (इनपुट: ANI)
Published on:
02 Jun 2026 08:13 pm
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