
PM Narendra Modi visit to Russia (File Photo)
PM Modi Russia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 8 जुलाई से 9 जुलाई तक दो दिवसीय रूस का दौरा है। यूक्रेन से युद्ध के बीच में प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) अपने पहले रूस के दौरे पर जा रहे हैं जिस पर अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नजरें बनी हुई हैं क्योंकि एक तरफ जहां रूस से नाटो (NATO) समेत पूरी दुनिया किनारा कर रही है उसी दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत और रूस के संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। पीएम मोदी के इस दौरा को लेकर रूस की तरफ से जवाब भी आया है कि मोदी और पुतिन (Vladimir Putin) की होने वाली मीटिंग को लेकर पूरी दुनिया आज इन दोनों नेताओं को देखकर जल रही है। जिसमें सबसे ज्यादा अमेरिका और नाटो देश घबराए हुए हैं। उनमें हलचल मची है कि आखिर रूस और भारत (India Russia Relations) में क्या समझौते होंगे। भारत का रूस यूक्रेन युद्ध पर क्या रुख रहेगा। पीएम मोदी इस बारे में पुतिन से क्या बात करते हैं।
रूस की समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के मुताबिक क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन को लेकर कहा कि अमेरिका समेत पश्चिमी देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 8-9 जुलाई को होने वाली रूस यात्रा पर करीब से और ईर्ष्या से नजर रख रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और पश्चिम अब जल रहे हैं। इसका मतलब है कि वे इस पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उनकी करीबी निगरानी का मतलब है कि वे इसे बहुत महत्व देते हैं और वो गलत नहीं हैं यानी इस मीटिंग में ऐसा बहुत कुछ है जिसे अमहमियत दी जा रही है।
मॉस्को में PM मोदी के एजेंडे में राष्ट्रपति पुतिन के साथ पारस्परिक महत्व के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा शामिल है। भारत-प्रशांत विकास को लेकर भी दोनों के बीच बातचीत होगी। जो भारत और रूस दोनों के लिए इसके महत्व को रेखांकित करता है।
अमेरिका के रूस पर लगाए गए कई प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखा है। इन प्रतिबंधों के बावजूद, दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग जारी है।
1- CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act): 2017 में अमेरिका ने CAATSA के तहत रूस, ईरान, और उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाए। इस कानून का उद्देश्य इन देशों की “दुश्मनी भरी गतिविधियों” को रोकना था। इसमें रूस के खिलाफ प्रतिबंधों में उसकी रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों को लक्षित किया गया।
2- क्रीमिया संकट-2014 में रूस के क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों ने रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया।
बता दें कि इससे पहले 2021 में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के बीच आखिरी बैठक हुई थी। तब से, दुनिया भर में बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन रूस और भारत के संबंधों को लगातार विस्तार मिला है।
Published on:
08 Jul 2024 10:33 am
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