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ऑफिस बुलाने की जिद ने छीनी मासूम की जान: प्रेग्नेंसी में वर्क फ्रॉम होम नहीं दिया तो कंपनी पर 200 करोड़ का जुर्माना

Pregnancy WFH Lawsuit 200 Crore Fine: प्रेग्नेंसी में वर्क फ्रॉम होम नहीं देने पर अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला। प्रीमैच्योर डिलीवरी के बाद बच्चे की मौत मामले में कंपनी पर करीब 20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।f

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भारत

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Rahul Yadav

Mar 22, 2026

Pregnancy WFH Lawsuit 200 Crore Fine

प्रेग्नेंसी में WFH नहीं मिला, बच्चे की मौत: कंपनी पर करोड़ों का जुर्माना

Pregnancy WFH Lawsuit 200 Crore Fine: अमेरिका के ओहायो राज्य में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां गर्भवती महिला को वर्क फ्रॉम होम (WFH) की अनुमति न देने का मामला कोर्ट तक पहुंचा और कंपनी को भारी जुर्माना भरना पड़ा। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने कंपनी को करीब 2.25 मिलियन डॉलर (लगभग 18-20 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

WFH की जगह ऑफिस आने का दबाव

रिपोर्ट्स के अनुसार, चेल्सी वॉल्श नाम की महिला टोटल क्वालिटी लॉजिस्टिक्स (TQL) नाम की कंपनी में काम करती थी। फरवरी 2021 में उन्होंने अपनी हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी को देखते हुए घर से काम करने की अनुमति मांगी थी।

हालांकि कंपनी ने उन्हें या तो ऑफिस आकर काम करने या फिर बिना सैलरी छुट्टी लेने का विकल्प दिया था। इससे उनकी आय और हेल्थ इंश्योरेंस पर असर पड़ता, इसलिए मजबूरी में उन्हें ऑफिस जाना पड़ा।

समय से पहले हुई डिलीवरी, नवजात की मौत

लगातार कुछ दिनों तक ऑफिस में काम करने के बाद 24 फरवरी को महिला की समय से पहले डिलीवरी हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची का जन्म तय समय से करीब 18 हफ्ते पहले हुआ था। जन्म के समय बच्ची की सांस चल रही थी और दिल भी धड़क रहा था, लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई।

परिवार का आरोप था कि अगर महिला को घर से काम करने की अनुमति मिल जाती, तो उसे आराम मिल सकता था और यह स्थिति टाली जा सकती थी।

कोर्ट ने कंपनी को ठहराया जिम्मेदार

मामला हैमिल्टन काउंटी की अदालत में पहुंचा, जहां जूरी ने कंपनी को जिम्मेदार माना। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी को कर्मचारी की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित सुविधा देनी चाहिए थी। इसी आधार पर कंपनी पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया।

प्रेग्नेंट कर्मचारियों के अधिकार

अमेरिका में प्रेग्नेंट कर्मचारियों के लिए कई कानून मौजूद हैं। प्रेग्नेंट वर्कर्स फेयरनेस एक्ट के तहत कंपनियों को गर्भवती कर्मचारियों को ‘रीजनेबल अकॉमोडेशन’ यानी उचित सुविधा देना जरूरी होता है, जब तक इससे कंपनी को असामान्य नुकसान न हो।

इसके अलावा ‘प्रेग्नेंसी डिस्क्रिमिनेशन एक्ट’ के तहत गर्भावस्था के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव करना गैरकानूनी है।

भारत में क्या हैं नियम

भारत में मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 के तहत महिलाओं को 26 हफ्तों की पेड छुट्टी का अधिकार मिलता है। हालांकि वर्क फ्रॉम होम देना अनिवार्य नहीं है, लेकिन अगर काम की प्रकृति अनुमति देती है और दोनों पक्ष सहमत हों, तो यह सुविधा दी जा सकती है।