
पुतिन के कुरिल द्वीप पहुंचते ही भड़का जापान। फोटो सोर्स-वीडियो ग्रैब X (@RT_hindi_)
Putin Kuril Islands Visit: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के विवादित कुरिल द्वीप समूह के हालिया दौरे से रूस और जापान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पड़ोसी सखालिन में नौसैनिक अभ्यास देखने के बाद पुतिन रूसी नियंत्रण वाले इस द्वीप समूह पहुंचे। क्रेमलिन की ओर से जारी फुटेज में उन्हें स्थानीय मछली प्रसंस्करण संयंत्र ( Fish Processing Plant)का दौरा करते और कैवियार का स्वाद लेते हुए दिखाया गया।
पुतिन के इस दौरे पर जापान ने तत्काल आपत्ति जताई। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी (Toshimitsu Motegi) ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि चार दक्षिणी द्वीप, जिन्हें जापान में 'नॉर्दर्न टेरिटरीज' कहा जाता है, जापान के क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा हैं।
जापान और रूस के बीच कुरिल द्वीपों को लेकर विवाद की जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों तक जाती हैं। अगस्त 1945 में अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने के कुछ दिनों बाद सोवियत संघ ने जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा की और इस द्वीप समूह पर कब्जा कर लिया। इसके बाद करीब 17,000 जापानी निवासियों को वहां से निकाल दिया गया। समय के साथ उनकी जगह रूसी लोग बसते गए। आज वहां रहने वाले करीब 20,000 लोगों में इन रूसी बसने वालों के वंशज भी शामिल हैं।
रूस और जापान के बीच जिन 4 दक्षिणी द्वीपों को लेकर विवाद है, उनमें इटुरुप, कुनाशिर, शिकोटान और हाबोमाई द्वीप समूह शामिल हैं। दोनों देश इन द्वीपों के स्वामित्व को लेकर सहमत नहीं हो सके हैं। यही वजह है कि रूस और जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने वाली शांति संधि पर तकनीकी रूप से अब तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
साल 1956 में सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव (Nikita Khrushchev) ने कुछ समय के लिए छोटे आकार के 2 द्वीपों को जापान को लौटाने की पेशकश की थी। हालांकि, आधुनिक दौर में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह ठहर गई। रूस के 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद जापान पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के साथ मजबूती से खड़ा हो गया। इसके बाद मॉस्को ने बातचीत रोक दी और चीन तथा उत्तर कोरिया के साथ अपने रणनीतिक संबंधों पर ज्यादा जोर दिया।
कुरिल द्वीप समूह होक्काइडो से लेकर कामचटका प्रायद्वीप तक करीब 1,300 किलोमीटर तक फैला हुआ है। यह क्षेत्र प्रशांत महासागर और ओखोत्स्क सागर के बीच एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के तौर पर काम करता है। इन द्वीपों पर नियंत्रण का मतलब समृद्ध मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों, महत्वपूर्ण खनिज भंडार और उत्तरी प्रशांत क्षेत्र में एक अहम सैन्य ठिकाने पर नियंत्रण भी है।
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने पुतिन के दौरे पर विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि नॉर्दर्न टेरिटरीज ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जापान के क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने सरकार की ओर से इस दौरे का कड़ा विरोध दर्ज कराया।
Updated on:
13 Aug 2026 03:28 pm
Published on:
13 Aug 2026 03:28 pm
