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नेपाल हिंसा पर पत्रिका की ग्राउंड रिपोर्ट, ‘हालात तनावपूर्ण, पुलिस ने सीधे सिर में मारी गोली’

नेपाल में हिंसा के कारण 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 300 से ज्यादा घायल हैं। पत्रिका संवाददाता अशोक तिवारी ने बताया कि काठमांडू में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। पढ़िए पूरी खबर

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Situation tense in Kathmandu

काठमांडू में हालात तनावपूर्ण (फोटो-IANS)

Nepal Protest: पत्रिका संवाददाता अशोक तिवारी काठमांडू में मौजूद हैं। उन्होंने नेपाल में प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करते हुए बताया कि यहां हालात भयावह है। अशोक ने कहा, 'मैं इस वक्त काठमांडू में हूं। हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। मैंने प्रदर्शन में शामिल 24 वर्षीय छात्र शुभम राजभंडारी से बात की तो उसने कहा, हमें गुस्सा सिर्फ सोशल मीडिया बैन से नहीं है। यह तो चिंगारी थी, असली लड़ाई भ्रष्टाचार और नेताओं की मनमानी के खिलाफ है। सुबह भीड़ कम थी लेकिन अब पूरे काठमांडू में जैसे युवाओं का सैलाब उमड़ा है। संसद भवन की ओर बढ़ते युवाओं को रोकने के लिए पुलिस ने कंटीले तार और बैरिकेड्स लगाए थे लेकिन Gen-Z के रेले ने इन्हें भेद दिया। टकराव के बाद पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिससे 25 युवाओं की अब तक मौत हो चुकी है। हालांकि पुलिस मौतों का आंकड़ा 20 बता रही है। कुछ जगह तो पुलिस ने सीधे सिर और सीने में गोलियां चलाईं।'

सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हैं। युवाओं में गोलियों के प्रति कहीं डर नहीं दिख रहा, बात करते ही भ्रष्टाचारी नेताओं की ओर से आवाज दबाने के प्रति आक्रोश प्रकट करते हैं। युवाओं के हाथों में तख्तियों पर ‘करप्शन बंद करो’ सोशल मीडिया नहीं' और 'भ्रष्टाचार के खिलाफ युवा' लिखा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का पुतला भी जलाया गया है।

नेपाल में प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने कहा कि हमारा विरोध शांतिपूर्ण था। पुलिस ने गोलीबारी शुरू की। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, पुलिस की हिंसा बढ़ती गई। युवाओं पर गोलियां चलीं, जो शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के सिद्धांतों के खिलाफ है। एक अन्य ने कहा, पुलिस ने अचानक गोलियां चलाईं जो मुझे नहीं लगीं, बल्कि मेरे पीछे खड़े मेरे एक दोस्त के हाथ में गोली लगी। संसद के अंदर से भी गोलियों की आवाज आ रही थी। सडक़ पर खड़े मेरे एक दोस्त के सिर में गोली मारी। जो लोग सत्ता में बैठे हैं, वे ताकत हम पर नहीं थोप सकते।

क्या है टाइमलाइन?

3 सितंबर: स्थानीय कानूनों का पालन नहीं करने पर सरकार ने फेसबुक, ए€स सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉ्र्स बैन किए।
4 सितंबर: युवाओं में आक्रोश। काठमांडू यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन।
5 सितंबर: वीपीएन से ‘नेपाल प्रोटेस्ट’ और ‘नेपोकिड’ ऑनलाइन ट्रेंड्स से छात्र जुड़े।
7 सितंबर: काठमांडू, पोखरा, नेपालगंज आदि शहरों में विरोध, पुलिस का लाठीचार्ज।
8 सितंबर: काठमांडू में संसद परिसर में घुसे प्रदर्शनकारी।