
Brain and Heart
दुनिया पर मानसिक बीमारियों का बोझ अब दिल की बीमारियों से ज़्यादा हो गया है। जी हाँ, आपने सही पढ़ा। अमेरिका (United States Of America) के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) ने हाल ही में एक रिसर्च की है। आइएचएमई की रिसर्च के अनुसार नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाली स्थितियाँ जैसे स्ट्रोक, माइग्रेन और डिमेंशिया जैसे रोग अब दुनियाभर में खराब स्वास्थ्य का प्रमुख कारण बन गए हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि दुनिया में दिल की बीमारियाँ कम हो गई हैं। इसका मतलब है कि दुनिया में दिल की बीमारियों से ज़्यादा अब मानसिक रोग हो गए हैं।
चौंकाने वाले आंकड़े
आइएचएमई की रिसर्च के अनुसार दुनियाभर में करीब 3.4 अरब लोगों ने 2021 में न्यूरोलॉजिकल स्थिति का सामना किया। इस तरह से वैश्विक आबादी का करीब 43% हिस्सा मानसिक बीमारियों से जूझता दिखा, जो कि पहले सोचे गए आंकड़ों से बहुत ज़्यादा है। आइएचएमई के नेतृत्व में की गई यह रिसर्च एक्सपर्ट्स ने की जो हाल ही में सामने आई है। और 2021 से 2024 तक यह आंकड़ा और भी बढ़ा है।
मानसिक बीमारियों में 59% इजाफा
आइएचएमई रिसर्च की प्रमुख लेखक जैमी स्टीनमेटज (Jaimie Steinmetz) ने दावा किया है कि रिसर्च के परिणामों से पता चलता है कि हमारा नर्वस सिस्टम अब दुनिया में बीमारियों का एक प्रमुख कारण बन गया है। जैमी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में मानसिक बीमारियों में 59% इजाफा है। यह वृद्धि मुख्य रूप से इसलिए दर्ज की गई है क्योंकि दुनिया की आबादी बूढ़ी हो रही है और इस संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी ही रही है।
न्यूरोलॉजिकल स्थितियों का अध्ययन
शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में 1990 से 2021 तक 204 देशों और क्षेत्रों में 37 अलग-अलग न्यूरोलॉजिकल स्थितियों का अध्ययन किया। इसमें यह देखा गया कि कैसे मानसिक विकारों ने खराब स्वास्थ्य, विकलांगता और समय से पहले मौत की स्थितियों को प्रभावित किया।
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Published on:
19 Mar 2024 12:35 pm
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