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Putin के 15 विरोधियों की एक जैसी मौत, अब भारत में कुछ वक्त रहे इस पत्रकार के बारे में आई बुरी खबर

Sudden Russian Death Syndrome: पुतिन विरोधियों की अचानक होने वालीं मौतों को अब 'सडन रशियन डेथ सिंड्रोम' नाम से जाना जाता है। माना आज रहा है कि रूस छोड़कर भागे पत्रकार की भी हत्या कराई गई है।

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भारत

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Newsdesk

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Neeraj Nayyar

Jan 09, 2026

Russian journalist found dead in Paris

पुतिन का विरोध करने वालों का बचना मुश्किल हो जाता है। ({PC: AI)

Russian exile journalist killed: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के डर से देश छोड़कर भागे एक पत्रकार की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई है। पेरिस पुलिस को येवगेनी सैफ़्रोनोव का शव (Yevgeny Safronov mysterious death) एक बिल्डिंग के बाहर मिला है। पुलिस का कहना है कि पत्रकार खिड़की से गिरा है, लेकिन येवगेनी के कारीबियों को उनकी हत्या का शक है। क्योंकि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं। रूस से भागने के बाद येवगेनी सैफ़्रोनोव कुछ समय तक भारत में भी रहे थे। इसके बाद उन्होंने तुर्की होते हुए फ्रांस को अपना ठिकाना बना लिया था।

मौत से पहले भेजा था मैसेज

मिरर यूके की रिपोर्ट बताती है कि येवगेनी सैफ़्रोनोव ने कुछ दिन पहले अपने रिश्तेदारों को मैसेज भेजकर बताया था कि उनका फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और मैसेजिंग ऐप्स सभी हैक हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि मेरे सभी मोबाइल फोन और एप्लिकेशन क्लोन कर लिए गए हैं। मेरे टेक्स्ट मैसेज और फोन पर बातचीत को इंटरसेप्ट किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पत्रकार की मौत बिल्डिंग की खिड़की से गिरने के चलते हुई है। फिर भी सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। वहीं, येवगेनी के रिश्तेदारों का कहना है कि यह हादसा नहीं बल्कि हत्या है।

इसलिए छोड़ा था Russia

रूस के 38 वर्षीय जर्नलिस्ट येवगेनी सैफ़्रोनोव 2024 के आखिर तक 'ओपन मीडिया' के लिए काम करते थे। यह एक ऐसा मीडिया आउटलेट था जिसे क्रेमलिन के आलोचक Mikhail Khodorkovsky ने शुरू किया था। ओपन मीडिया को रूसी अधिकारियों द्वारा विदेशी एजेंट घोषित किए जाने के बाद उन्हें रूस से भागने को विवश होना पड़ा। येवगेनी को डर था कि अगर वह रूस में रुकते तो पुतिन सरकार उन्हें किसी न किसी आरोप में सलाखों के पीछे पहुंचा देती। सैफ़्रोनोव रूस में पत्रकारों पर दबाव, पुतिन के आलोचक एलेक्सी नवलनी से जुड़े विरोध प्रदर्शनों और पुतिन के शासन में बोलने की आजादी पर बढ़ती पाबंदियों के बारे में रिपोर्ट करते थे। फरवरी 2021 में, उन्हें नवलनी से जुड़ी एक अदालती सुनवाई को कवर करने की कोशिश के दौरान कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। मालूम हो कि एलेक्सी नवलनी की 2024 में एक रूसी जेल में मौत हो गई थी।

भारत में भी कुछ वक्त बिताया

रूस छोड़ने के बाद, येवगेनी कुछ समय तक भारत में रुके। इसके बाद तुर्की गए और फ्रेंच वीजा मिलने पर उन्होंने पेरिस को अपना ठिकाना बना लिया। पेरिस में रहने वाले एक और रूसी पत्रकार का कहना है कि येवगेनी सैफ़्रोनोव को लगता था कि उन पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, उन्होंने डराने-धमकाने की बात भी कही थी। पुलिस को घटनास्थल से रूसी भाषा में लिखे कुछ खत मिले हैं। पत्रकार का रूममेट खुद भी रूसी है, जो हादसे के वक्त घर पर नहीं था। माना जा रहा है कि पत्रकार की मौत का रूस से कोई कनेक्शन हो सकता है। हालांकि, पुलिस फिलहाल ऐसा कुछ भी कहने से बच रही है।

कोई खिड़की से गिरा, कोई पहाड़ से

फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद व्लादिमीर पुतिन के कम से कम 15 आलोचकों की इसी तरह खिड़की या पहाड़ से गिरकर मौत हुई है। ऐसी घटनाओं को अब 'सडन रशियन डेथ सिंड्रोम' नाम से जाना जाता है। पिछले साल रूस के एंटी-मोनोपॉली रेगुलेटर के प्रमुख आर्थर प्रियाखिन (Artur Pryakhin) और सरकारी तेल कंपनी ट्रांसनेफ्ट के वाइस प्रेसिडेंट एंड्रे बडालाव (Andrey Badalov) की भी रहस्यमय ढंग से मौत हो गई थी। दोनों के मॉस्को में एक बिल्डिंग से गिरने की बात कही गई थी। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि येवगेनी सैफ़्रोनोव की हत्या कराई गई है। क्योंकि वह भी रूस की दमनकारी नीतियों का विरोध करते रहे हैं।