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सऊदी में नजरुल को मिली मौत की सजा, खबर सुनते ही बुआ को पड़ा दिल का दौरा, चली गई जान

Nazrul Islam News: सऊदी अरब में बांग्लादेशी नागरिक नजरुल इस्लाम को फांसी दिए जाने की खबर के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रिश्तेदारों का दावा है कि खबर सुनकर उसकी बुआ की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। अब परिवार शव की वापसी और मामले में न्याय की मांग कर रहा है। पढ़ें पूरी खबर...
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भारत

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Pratiksha Gupta

•

Oct 21, 2026

Nazrul Islam Saudi Arabia

सऊदी में 'अनैतिक' अचारण पर सजा-ए-मौत पाने वाले बांग्लादेशी कपल नजरूल इस्लाम और स्वीटी अख्तर (फोटो सोर्स-@Anant)

Bangladeshi Couple Death News: सऊदी अरब में बांग्लादेशी नागरिक नजरुल इस्लाम को फांसी दिए जाने की खबर ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। रिश्तेदारों के मुताबिक, नजरुल की मौत की खबर सुनकर उसकी बुआ को दिल का दौरा पड़ा और उनकी जान चली गई। परिवार को अब भी नजरुल के शव का इंतजार है। वहीं, बांग्लादेश सरकार ने मामले में जानकारी साझा करने में हुई कथित चूक को लेकर सऊदी अरब से जवाब मांगा है।

तीन साल पहले हुई थी गिरफ्तारी

जानकारी के अनुसार, नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर को साल 2023 में सऊदी पुलिस ने हिरासत में लिया था। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दोनों पति-पत्नी हैं और मक्का शहर की एक मशहूर मस्जिद के समीप 'अनैतिक गतिविधियों' में शामिल थे, जिसके चलते उन्हें दोषी ठहराया गया। हालांकि, अब परिजनों ने साफ कर दिया है कि दोनों के बीच ऐसा कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं था। परिजनों का कहना है कि नजरुल सऊदी में सफाईकर्मी का काम करता था और जेल में रहने के दौरान वह फोन पर परिजनों से बात भी करता था, लेकिन उन्हें फांसी की सजा के बारे में कोई भनक तक नहीं लगने दी गई।

कर्ज में डूबे बुजुर्ग पिता, अब शव की गुहार

नजरुल के पिता अब्दुल बशीर ने बताया कि उन्होंने अपने सबसे बड़े बेटे को बेहतर भविष्य और परिवार की गरीबी दूर करने के लिए 7 लाख का कर्ज लेकर सऊदी अरब भेजा था। 10 नवंबर 2022 को घर से निकला नजरुल अब कभी वापस नहीं लौटेगा। पिता का कहना है कि जिन लोगों से कर्ज लिया था, वे अब पैसे चुकाने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि उनके बेटे का शव सरकारी खर्च पर वतन वापस लाया जाए और अगर उसे बिना किसी ठोस कानूनी आधार के फांसी दी गई है तो मामले में इंसाफ दिलाया जाए।

दूसरी तरफ मजदूर पिता की बेबसी

ऐसी ही दर्दनाक कहानी स्वीटी अख्तर के घर की भी है। स्वीटी के पिता फजल मिया, जो पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर हैं, उन्होंने भी 1.5 लाख टका का कर्ज लेकर अपनी छोटी बेटी को खाड़ी देश भेजा था। स्वीटी ने जेल से अपने पिता को फोन पर बताया था कि कार्यस्थल पर साथी महिला कर्मचारियों से विवाद के बाद उसे झूठे मामले में फंसाया गया था। उसने 15 दिन पहले ही घर पर बात की थी और कहा था कि वह जल्द ही जेल से रिहा होकर आ जाएगी, लेकिन अचानक उसकी मौत की खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है।

सऊदी सरकार से जवाब मांग रहा बांग्लादेश

इस पूरी घटना के बाद बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अरब के रवैये पर कड़ा एतराज जताया है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर कूटनीतिक संबंध होने के बावजूद फांसी से पहले कोई पूर्व सूचना या जानकारी साझा नहीं की गई। 1963 के वियना कन्वेंशन के तहत किसी विदेशी नागरिक को कानूनी मदद और दूतावास से संपर्क का अधिकार होता है, लेकिन जेद्दा स्थित बांग्लादेशी महावाणिज्य दूतावास को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। फिलहाल बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अरब से इस पूरी कार्रवाई पर स्पष्टीकरण मांगा है।