
Saudi Arabia desert.
Chicken manure: सऊदी अरब ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change ) से निपटने और पर्यावरण (environment) संरक्षण के उद्देश्य से एक विशाल वृक्षारोपण परियोजना की शुरुआत की है। किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAUST) के वैज्ञानिकों ने रेगिस्तानी रेत को उपजाऊ मिट्टी में बदलने के लिए एक अभिनव उत्पाद विकसित किया है। यह उत्पाद चिकन खाद (Chicken manure) से बनाया गया है, जो पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है और भूमि की उर्वरता में सुधार करता है।
इस परियोजना के तहत, देश ने अपने रेगिस्तानी इलाकों में 10 बिलियन पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा है। यह पहल सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव (SGI) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 74 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि को पुनर्जीवित करना है। यह कदम न केवल सऊदी अरब का पर्यावरण सुधारने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में भी मददगार साबित होगा।
सऊदी अरब का उद्देश्य इस वृक्षारोपण परियोजना के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है। देश के रेगिस्तानी क्षेत्र, जो पहले से ही अत्यधिक गर्मी और सूखा सहते हैं, वहां पेड़ लगाने से न केवल वातावरण में सुधार होगा, बल्कि यह भूमि की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ाएगा। इसके अलावा, यह परियोजना सऊदी अरब के 2030 के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें पर्यावरणीय सुधार और स्थिरता के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
अरब के रेगिस्तान में 10 अरब पेड़ लगाने से कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी, वायुमंडलीय गुणवत्ता में सुधार होगा, और बालू तूफानों की आवृत्ति में कटौती होगी। 40 मिलियन हेक्टेयर से अधिक बंजर भूमि को उपजाऊ बनेगी, जिससे कृषि योग्य भूमि का विस्तार होगा और जैव विविधता में वृद्धि होगी। साथ ही देश के 30% क्षेत्र को प्राकृतिक आरक्षित क्षेत्रों में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे वन्यजीवों की रक्षा होगी और पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा।
सऊदी अरब जो मुख्य रूप से तेल उद्योग पर निर्भर है और वह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझ रहा है। देश में अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी है। इन समस्याओं से निपटने के लिए सऊदी अरब ने वैश्विक स्तर पर अपने पर्यावरणीय दायित्वों को स्वीकार किया है और अब वह ठोस कदम उठा रहा है। इसलिए वृक्षारोपण परियोजना के तहत, विशेषकर रेगिस्तान क्षेत्रों में पेड़ लगाए जाएंगे जो सूखा सहन कर सकते हैं और कम पानी में जीवित रह सकते हैं।
यह परियोजना न केवल सऊदी अरब, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भेजती है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो यह अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। साथ ही, इससे पर्यावरणीय संरक्षण के वैश्विक प्रयासों को भी बल मिलेगा। सऊदी अरब का यह कदम जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव डालने के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे सूखे और रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी वृक्षारोपण से पर्यावरण को बचाया जा सकता है।
सऊदी अरब में 10 बिलियन पेड़ लगाने से पर्यावरणीय लाभ तो होंगे ही, साथ ही साथ इससे आर्थिक लाभ भी मिलेगा। पेड़ लगाने से पर्यावरण में सुधार के साथ-साथ जैव विविधता भी बढ़ेगी, जो कृषि और जल संसाधनों को भी प्रभावित करेगी। इसके अलावा, यह परियोजना हरित रोजगार सृजन में भी सहायक होगी, जिससे स्थानीय समुदायों को फायदा होगा।
बहरहाल सऊदी अरब की 10 बिलियन पेड़ों की वृक्षारोपण परियोजना जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण पहल है। यह परियोजना न केवल देश के पर्यावरणीय सुधार में मदद करेगी, बल्कि यह वैश्विक जलवायु संकट से निपटने में भी योगदान देगी। इस प्रकार, सऊदी अरब अपने पर्यावरणीय दायित्वों को निभाते हुए एक स्थिर और हरित भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
Published on:
11 Mar 2025 01:10 pm
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