
ईरान का सैयद 107 ड्रोन । ( फोटो: सोशल)
Sayyad-107 Drone : मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक नए और तकनीकी रूप से उन्नत चरण में प्रवेश कर चुका है। ईरान की ओर से विकसित सैयद 107 ड्रोन ने इजरायल और अमेरिकी मिलिट्री एयरबेस पर हमला करके अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह विशेष ड्रोन इजरायल के अत्याधुनिक आयरन डोम और अन्य रडार सिस्टम को सफलतापूर्वक चकमा देने में सक्षम साबित हुआ है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए यह एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गया है। इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों के सामने आधुनिक ड्रोन तकनीक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
यह ड्रोन विशेष रूप से रडार की पकड़ से बचने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी उड़ान क्षमता लगभग 100 किलोमीटर तक है और यह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते समय उड़ान की ऊंचाई और दिशा बार-बार बदल सकता है। हाल ही में इजरायल के हाइफा के पास बिन्यामिना में स्थित गोलानी ब्रिगेड के बेस पर इसी ड्रोन का उपयोग कर हमला किया गया था। इस सटीक हमले में इजरायल रक्षा बल के चार जवान मारे गए थे और साठ से अधिक घायल हुए थे। उड़ान भरते समय यह जमीन या समुद्र की सतह के बेहद करीब आ जाता है, जिससे रडार के लिए इसे ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है।
केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि सीरिया और इराक सीमा पर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी इस ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया है। इस्लामिक रेजिस्टेंस जैसे हथियारबंद समूहों ने ईरानी तकनीक से लैस इन ड्रोन्स का उपयोग करके अमेरिकी सुरक्षा ग्रिड की खामियों को उजागर कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, वाणिज्यिक इंजनों और जापानी पुर्जों के उपयोग से इन ड्रोन्स का निर्माण किया जा रहा है, जो कड़े प्रतिबंधों के बावजूद हथियारों की सप्लाई चेन की मजबूती को दर्शाता है
सैयद 107 ड्रोन जैसे उपकरण यह साबित करते हैं कि कम लागत वाले हथियार भी अरबों डॉलर की रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस ड्रोन के निर्माण में कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे हल्का बनाता है और रडार पर इसकी थर्मल व इलेक्ट्रॉनिक छवि को कम कर देता है। इसके आगे के हिस्से में लगा विस्फोटक सीधे कंक्रीट और बख्तरबंद लक्ष्यों को भेदने की क्षमता रखता है।
इस हमले के बाद इजरायली रक्षा प्रतिष्ठान में वायु रक्षा प्रणालियों की विफलता को लेकर उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। इजरायली वायुसेना ने अब ड्रोन निर्माण, सप्लाई और संचालन से जुड़ी यूनिट्स (विशेषकर यूनिट 127) को सीधे निशाना बनाने की रणनीति अपनाई है। अमेरिका के रक्षा विभाग ने भी इन हमलों को गंभीरता से लिया है और अपने एयरबेस की सुरक्षा के लिए नई और उन्नत एंटी-ड्रोन तकनीक तैनात करने के निर्देश जारी किए हैं।
हमले के तुरंत बाद इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से अपनी मौजूदा रक्षा प्रणालियों का तकनीकी आकलन शुरू कर दिया है। रडार से गायब होने वाले इन ड्रोन्स की त्वरित पहचान के लिए सैटेलाइट नेविगेशन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को और अधिक संवेदनशील बनाया जा रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इजरायल की सेना लेबनान और सीरिया में स्थित ड्रोन लॉन्चिंग साइट्स पर बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ईरान इन आधुनिक ड्रोन्स का सीधा उपयोग करने के बजाय अपने सहयोगी गुटों (जैसे हिजबुल्लाह) के माध्यम से इनका संचालन कर रहा है। यह 'प्रॉक्सी वॉर' की वह सुनियोजित रणनीति है, जिसमें मुख्य देश सीधे तौर पर युद्ध में शामिल हुए बिना दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाता है। ड्रोन में वाणिज्यिक जीपीएस और सस्ते इंजनों का उपयोग इसे आर्थिक रूप से किफायती बनाता है, जिससे इसे बड़ी संख्या में लॉन्च किया जा सकता है।
Updated on:
01 Apr 2026 04:59 pm
Published on:
01 Apr 2026 04:55 pm
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