
Human skull
वैज्ञानिकों ने एक 700 साल पुरानी ममी पर रिसर्च करते हुए एक बेहद पेचीदा जेनेटिक पहेली को सुलझाने का दावा किया है। बोलीविया में मिली इस ममी की जांच में 'स्ट्रेप्टोकोकस पायोजेन्स' नामक बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है। इसे आमतौर पर 'ग्रुप A स्ट्रेप' भी कहा जाता है। रिसर्च में पाया गया कि यह बैक्टीरिया आज के समय के बैक्टीरिया के समान है, जो लोगों में गले का इंफेक्शन और स्कार्लेट फीवर (लाल बुखार) जैसी बीमारियों का कारण बनता है। इस रिसर्च से पुष्टि हुई कि ऐसे इंफेक्शन दक्षिण अमेरिका में यूरोपीय लोगों के पहुंचने से पहले ही मौजूद थे। इससे साफ हुआ है कि स्कार्लेट फीवर बीमारी यूरोपीय लोग दक्षिण अमेरिका लेकर नहीं गए थे।
आधुनिक एंटीबायोटिक दवाओं के आविष्कार से पहले स्कार्लेट फीवर बचपन में होने वाली मृत्यु और विकलांगता का एक प्रमुख कारण था। कभी-कभी इससे दृष्टि और श्रवण शक्ति भी कम हो जाती थी। बच्चों के विकास पर इसका बेहद खराब असर पड़ता था।
वैज्ञानिकों ने एक मानव खोपड़ी के दांत पर रिसर्च करते हुए इस पहेली को सुलझाया। यह एक पुरुष की खोपड़ी थी, जो लगभग 1283 से 1383 के बीच जीवित था। वैज्ञानिकों को उसके शरीर में सिर्फ एक ही बैक्टीरिया नहीं मिला, बल्कि कुछ और बैक्टीरिया भी मिले, जिससे संकेत मिलता है कि उसे अपने जीवन में कई तरह के संक्रमण रहे होंगे।
इटली स्थित यूरैक रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर ममी स्टडीज़ के निदेशक ने बताया कि वह इस खास बैक्टीरिया को नहीं ढूंढ रहे थे। लेकिन जब वह अपनी टीम के साथ मिलकर ममियों के डीएनए की जांच करते हैं, तो सिर्फ इंसान के शरीर का डीएनए ही नहीं, बल्कि उसमें मौजूद छोटे-छोटे जीवाणुओं (सूक्ष्मजीवों) के डीएनए भी जांचते हैं। ऐसे में उन्होंने संयोगवश स्कार्लेट फीवर की पहेली सुलझाने में सफलता मिली।
Updated on:
21 Apr 2026 07:23 am
Published on:
21 Apr 2026 07:21 am
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