
नई दिल्ली।
कैमरून में हिंसा का असर अब सीधे बच्चों पर पड़ रहा है। यहां हिंसा की वजह से करीब सात लाख बच्चों का जीवन प्रभावित हुआ है। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवीय शाखा यूएनओसीएचए के हाल ही में किए गए विश्लेषण में सामने आया है। यहां हिंसक घटनाओं की वजह से कई इलाकों में स्कूलों को बंद करना पड़ा है। इससे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। माना जा रहा है कि अशिक्षा की वजह से यहां भूखमरी और आपराधिक घटनाओं में वृद्धि होगी। हालांकि, देश के विभिन्न हिस्सों में फैली हिंसा को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने कई बार पहल की है। मगर अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे दुनियाभर में सबसे जटिल संकटों में से एक बताया है
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय शाखा यूएनओसीएचए के हालिया विश्लेषण के अनुसार, कैमरून के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में हिंसा के कारण स्कूल बंद होने से सात लाख से भी अधिक बच्चे प्रभावित हुए हैं।वहीं, नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल के महासचिव जान एगलैंड और शिक्षा निदेशक यास्मीन शेरिफ ने हाल ही में देश की अपनी संयुक्त यात्रा के दौरान कैमरून में शिक्षा पर हमलों को समाप्त करने का आह्वान किया।
शिक्षा निदेशक यास्मीन शेरिफ ने अपने इस दौरे को रेखांकित करते हुए कहा कि कैमरून में आज जो स्थिति है यह दुनिया में सबसे जटिल मानवीय संकटों में से एक है। यहां पर बच्चों और युवाओं को अपने घरों और स्कूलों से भागना पड़ रहा है। साथ ही, उन्हें हिंसा और अपहरण की धमकी दी जा रही है। यही नहीं बाल विवाह कुप्रथा के तहत उन्हें बचपन में शादी के लिए मजबूर किया जा रहा है और सशस्त्र उग्रवादियों के समूहों में भर्ती किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हम मानवाधिकारों के सम्मान और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और सुरक्षित स्कूलों की घोषणा के सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान करते हैं। साथ ही यह उम्मीद करते हैं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण प्रदान किया जाएगा।
यूएनओसीएचए के अनुसार, कैमरून के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में तीन में से दो स्कूल बंद हैं। 24 नवंबर को कैमरून के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के एकोंडो टिटी में हुए हमले में चार बच्चों और एक शिक्षक की मौत हो गई थी। 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक एक गैर-राज्य सशस्त्र समूह द्वारा हाल ही में लगाए गए लॉकडाउन के कारण स्वास्थ्य और शिक्षा सहित बुनियादी सेवाओं तक सीमित पहुंच है।
Published on:
03 Dec 2021 10:08 pm
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