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150 मिनट की लिमिट पार करते ही ‘खतरनाक’ हो जाता है सोशल मीडिया

Social Media Time Limit: सोशल मीडिया पर टाइम लिमिट की भी सुविधा होती है। यह टाइम लिमिट पार करते हुए सोशल मीडिया खतरनाक हो जाता है।
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भारत

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Tanay Mishra

Sep 01, 2026

Smartphone use

स्मार्टफोन का इस्तेमाल (Photo - Washington Post)

स्मार्टफोन (Smartphone) और सस्ते हाई-स्पीड इंटरनेट (High-Speed Internet) के इस दौर में सोशल मीडिया (Social Media) पर स्क्रॉल करना हमारी रोज़मर्रा की आदत बन चुका है। लेकिन हाल ही में 'एनपीजे मेंटल हेल्थ रिसर्च' जर्नल की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने 1.8 लाख लोगों पर 10 साल तक की गई रिसर्च के बाद चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार हर दिन 150 मिनट से ज़्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल डिप्रेशन के जोखिम को तेज़ी से बढ़ा देता है। दुनिया में सबसे ज़्यादा सोशल मीडिया यूज़र्स वाले देश भारत (India) के लिए यह सिर्फ एक रिसर्च नहीं, बल्कि एक गंभीर पब्लिक हेल्थ वार्निंग है। आइए, मानसिक सेहत के लिए अपनी स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें।

टाइम लिमिट पार करना गंभीर

150 मिनट की टाइम लिमिट पार करना गंभीर होता है। भारत में लोगों का औसत स्क्रीन टाइम 3-4 घंटे का औसत होता है, जो 180-240 मिनट का होता है। वहीँ क्रिटिकल थ्रेशोल्ड लिमिट के अनुसार हर दिन 2.5 घंटे (150 मिनट) से ज़्यादा स्मार्टफोन नहीं चलना चाहिए। इसके पार जाते ही डिप्रेशन का ग्राफ तेज़ी से ऊपर जाता है। रिसर्च के अनुसार हर दिन हर 1 घंटा अतिरिक्त सोशल मीडिया चलाने पर डिप्रेशन का जोखिम लगभग 17% बढ़ता है, जो चिंताजनक स्थिति है। रिसर्च के अनुसार हर दिन हर 1 घंटा अतिरिक्त सोशल मीडिया चलाने पर डिप्रेशन का जोखिम लगभग 17% बढ़ता है, जो चिंताजनक स्थिति है। इससे आंखों पर जोर पढ़ने के साथ ही इंसान के मस्तिष्क पर भी दबाव बनता है। यह फायदेमंद नहीं, लेकिन नुकसानदायक भी नहीं है।

भारत के लिए खतरनाक

भारत में रील और शॉर्ट वीडियो का चलन तेज़ी से बढ़ा है। इसके लिए लोग स्मार्टफोन की स्क्रीन के आगे लंबा समय बिताते हैं। लगातार दूसरों की 'परफेक्ट लाइफ' देखने से तुलनात्मक हीनभावना और एंग्ज़ायटी पैदा होती है। युवा आबादी के लिए यह मानसिक स्वास्थ्य संकट को बढ़ा सकता है। भारत में मानसिक तनाव पर खुलकर बात करने में आज भी झिझक है। लोग डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते और सोशल मीडिया को ही 'तनाव दूर करने का ज़रिया' मानकर उसमें और गहराई से उलझ जाते हैं। इससे उन्हें कोई फायदा नहीं होता, बल्कि सिर्फ नुकसान होता है।