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ट्रंप की ‘गुंडागर्दी’ पर सुप्रीम कोर्ट का ब्रेक? आधी दुनिया को लूटने वाले टैरिफ प्लान पर कोर्ट ने फेरा पानी!

ट्रंप की योजना पर ब्रेक: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादास्पद 'टैरिफ प्लान' को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले पर फिलहाल रोक लगाते हुए सुनवाई को टाल दिया है।

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Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप। (फोटो-ANI)

Supreme Court: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ नीति पर अपना फैसला टाल दिया है। इस फैसले से ट्रंप की आर्थिक नीति, जिसे विपक्ष 'आधी दुनिया की लूट' करार देता है, पर कानूनी चुनौती और लंबी खिंच गई है। कोर्ट ने मंगलवार को तीन अन्य मामलों पर फैसले सुनाए, लेकिन टैरिफ मुद्दे को अनदेखा कर दिया। कोई अगली तारीख भी घोषित नहीं की गई, जिससे कम से कम एक महीने का और इंतजार तय माना जा रहा है।

ट्रंप के टैरिफ की वैधता पर सवाल, 1977 कानून का दुरुपयोग?

ट्रंप ने अपनी सिग्नेचर इकोनॉमिक पॉलिसी के तहत दुनिया भर के देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे, खासकर चीन, यूरोप और अन्य व्यापारिक साझेदारों पर। यह नीति 1977 के एक कानून पर आधारित थी, जो राष्ट्रपति को इमरजेंसी स्थितियों में विशेष अधिकार देता है। लेकिन चुनौतीकर्ताओं का कहना है कि ट्रंप ने इस कानून का दुरुपयोग किया, क्योंकि कोई राष्ट्रीय आपातकाल नहीं था। नवंबर 5, 2025 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने ट्रंप के अधिकार पर संदेह जताया था। जजों ने पूछा कि क्या व्यापार युद्ध को 'इमरजेंसी' माना जा सकता है? ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए जरूरी था, लेकिन आलोचक इसे 'गुंडागर्दी' बताते हैं, जो वैश्विक व्यापार को बिगाड़ रही है।

पिछले हफ्ते भी टाला गया फैसला, रिसेस का असर

यह पहली बार नहीं है जब कोर्ट ने फैसला टाला। पिछले हफ्ते भी इसी मुद्दे पर निर्णय रोक दिया गया था। अब कोर्ट चार हफ्तों के रिसेस में जा रहा है, इसलिए अगला संभावित फैसला फरवरी 20 को आ सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह टालमटोल ट्रंप की सिग्नेचर पॉलिसी पर चुनौती को कम से कम एक महीने और लंबा खींचेगा। इस बीच, टैरिफ से प्रभावित कंपनियां और देश अनिश्चितता में हैं। अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बढ़ती कीमतों का बोझ और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा जैसे मुद्दे और गहरा सकते हैं।

विपक्ष का हमला: ट्रंप की नीति 'लूट' है

डेमोक्रेट्स और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इस फैसले को ट्रंप की 'लूट' नीति पर ब्रेक मानते हुए स्वागत किया है। एक डेमोक्रेट सांसद ने कहा, ट्रंप ने आधी दुनिया को टैरिफ से लूटा, अब कोर्ट ने पानी फेर दिया। ट्रंप ने टैरिफ से अरबों डॉलर कमाए, लेकिन इससे अमेरिकी निर्यात प्रभावित हुए और वैश्विक तनाव बढ़ा। चीन ने जवाबी टैरिफ लगाए, जिससे ट्रेड वॉर छिड़ गया। अगर कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला देता है, तो भविष्य के राष्ट्रपतियों को और ज्यादा अधिकार मिल सकते हैं, लेकिन उलट फैसले से टैरिफ रद्द हो सकते हैं।

आगे क्या? वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नजर

यह मामला अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमाओं को परिभाषित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि देरी से ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक फायदा मिल सकता है, खासकर चुनावी साल में। लेकिन वैश्विक स्तर पर, यूरोपीय यूनियन और भारत जैसे देशों ने ट्रंप की नीति की आलोचना की है। भारत ने भी अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होकर जवाबी कदम उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इकोनॉमिक पॉलिसी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। फिलहाल, दुनिया सांस थामे इंतजार कर रही है।

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