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सुशीला कार्की का पति कर चुका है प्लेन हाइजैक, भारतीय भी थे सवार, रखी थी ये डिमांड

Sushila Karki: भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बीच पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की अंतरिम पीएम की दावेदार, लेकिन पति की विवादित हाईजैकिंग इतिहास ने खींचा ध्यान।

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Sushila Karki

सुशीला कार्की (फोटो- एक्स अकाउंट @RONBupdates)

Sushila Karki: नेपाल में भ्रष्टाचार और अधिनायकवाद के खिलाफ जनरेशन जेड के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद सुशीला कार्की का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं सुशीला कार्की को अंतरिम प्रमुख के रूप में प्रस्तावित किया गया है। वाराणसी के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) की पूर्व छात्रा सुशीला ने अपने एक साल के कार्यकाल (जुलाई 2016 से जून 2017) में भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसी फैसले सुनाए, जिससे वे देश की नायिका बनीं। लेकिन विडंबना यह है कि उनकी पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी नेपाल के इतिहास की पहली विमान अपहरण घटना से जुड़े हैं, जिसमें बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री माला सिन्हा भी सवार थीं।

1973 की सनसनीखेज हाईजैकिंग घटना

10 जून 1973 को बिराटनगर से काठमांडू जा रहे रॉयल नेपाल एयरलाइंस के 19-सीटर ट्विन ऑटर विमान को हाईजैक कर लिया गया। विमान में 19 यात्री और तीन क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनमें हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री माला सिन्हा शामिल थीं। माला सिन्हा, जिन्हें 'अनपढ़' और 'प्यार का सागर' जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है, उस समय धर्मेंद्र, देव आनंद और राज कपूर जैसे सितारों के साथ हिट फिल्में दे रही थीं। उनकी मोहक मुस्कान ने लाखों दिल जीते थे। हाईजैकर्स ने विमान को भारत के बिहार स्थित फोर्ब्सगंज के एक घास के मैदान पर उतारा। यह घटना नेपाल के इतिहास की पहली विमान अपहरण थी, जो राजशाही के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से की गई।

30 लाख रुपए के लिए बने थे हाईजैकर

हाईजैकिंग के मास्टरमाइंड थे तत्कालीन नेपाली कांग्रेस नेता गिरिजा प्रसाद कोइराला, जो बाद में चार बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने। दुर्गा प्रसाद सुबेदी, जो कोइराला के करीबी सहयोगी और नेपाली कांग्रेस के युवा नेता थे, ने नागेंद्र धुंगेल और बसंत भट्टराई के साथ मिलकर यह कांड अंजाम दिया। सुबेदी हाल ही में जेल से रिहा हुए थे और जापान एयरलाइंस की हाईजैकिंग से प्रेरित होकर इस योजना में शामिल हुए। विमान में बिराटनगर के बैंकों से ले जाए जा रहे 30 लाख भारतीय रुपये थे, जो नेपाल राष्ट्र बैंक के थे। हाईजैकर्स ने इन्हें लूट लिया और कार से दार्जिलिंग ले जाकर छिपा दिया। यह धन राजशाही विरोधी आंदोलन के लिए इस्तेमाल होने वाला था।

हाईजैकर्स की गिरफ्तारी और रिहाई

घटना के बाद सुबेदी और अन्य अपहरणकर्ताओं को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई, लेकिन 1975 में भारत में आपातकाल के दौरान रिहा कर दिया गया। सुबेदी ने बाद में अपनी आत्मकथा में इस घटना का जिक्र किया, जो 2018 में प्रकाशित हुई। विमान को बाद में नेपाल लौटाया गया और यह 41 साल तक उड़ान भरता रहा, जब तक 2014 में अरघाखांची में दुर्घटनाग्रस्त नहीं हो गया।

सुशीला कार्की की न्यायिक यात्रा

सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर में हुआ। उन्होंने बीएचयू से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स किया, जहां उनकी मुलाकात सुबेदी से हुई। कानून की पढ़ाई त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से पूरी करने के बाद 1979 में वकालत शुरू की। 2008 में सीनियर एडवोकेट बनीं और 2009 में सुप्रीम कोर्ट की अस्थायी जज, फिर 2010 में स्थायी। 2016 में वे नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं। उनके कार्यकाल में उन्होंने सूचना एवं संचार मंत्री जयप्रकाश गुप्ता को पद पर रहते हुए जेल की सजा सुनाई, जो नेपाल इतिहास का पहला ऐसा मामला था। उन्होंने लोकमान सिंह कार्की जैसे भ्रष्टाचार निदेशक को भी निर्वासित किया। हालांकि, उनके फैसलों से असंतुष्ट सरकार ने 2017 में महाभियोग की कोशिश की, लेकिन जन दबाव और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से बच गईं। आयु सीमा (65 वर्ष) पूरी होने पर इस्तीफा दिया।

वर्तमान संकट

वर्तमान में नेपाल दोराहे पर है। ओली सरकार के खिलाफ Gen Z के प्रदर्शनों ने हिंसा भड़का दी है। सुशीला कार्की को अंतरिम पीएम के रूप में प्रस्तावित किया गया है, लेकिन उनके पति का विवादित अतीत चर्चा का विषय बन गया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल ने विशेषज्ञों से सलाह ली है। कार्की को भ्रष्टाचार विरोधी छवि के कारण समर्थन मिल रहा है, लेकिन उन्हें निडरता दिखानी होगी। यह घटना नेपाल की राजनीति और बॉलीवुड के अनोखे संगम को दर्शाती है।