
स्वीडन में पति ने महिला को पुरुषों के पास भेजा ।(फोटो: पत्रिका)
Atrocity: इंसानियत और रिश्तों की गरिमा को पूरी तरह से खत्म कर देने वाली एक घटना यूरोप के स्वीडन से सामने आई है। यहां एक 61 वर्षीय व्यक्ति पर अपनी ही पत्नी के साथ अमानवीय व्यवहार करने और उसे देह व्यापार के अंधेरे कुएं में धकेलने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि इस व्यक्ति ने पैसों के लालच में अपनी पत्नी को 120 से अधिक पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। यह घटना जैसे ही अदालत की दहलीज तक पहुंची, पूरी दुनिया में इसकी चर्चा शुरू हो गई। इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी अपने निजी स्वार्थ और लालच की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं।
स्वीडन के उत्तरी हिस्से में स्थित क्राम फोर्स इलाके के पास एक सुनसान फार्महाउस में इस पूरी घटना को अंजाम दिया गया। आरोपी पति ने जानबूझकर इस एकांत जगह का चुनाव किया ताकि किसी भी पड़ोसी या बाहरी व्यक्ति को इस बारे में कोई भनक न लगे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह व्यक्ति अपनी पत्नी को नियमित रूप से नशीली दवाइयां देता था। नशे की हालत में होने के कारण महिला विरोध करने में पूरी तरह से असमर्थ रहती थी। इसके बाद आरोपी इंटरनेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ग्राहकों की तलाश करता था। वह पुरुषों से मोटी रकम वसूलता और फिर उन्हें अपने फार्महाउस पर बुलाता था। इस अपराध को और भी अधिक सुनियोजित तरीके से चलाने के लिए उसने पूरे घर में निगरानी कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों के जरिये वह अपनी पत्नी की हर हरकत पर नजर रखता था और आपराधिक वारदातों के वीडियो भी रिकॉर्ड करता था।
पीड़ित महिला अब उस व्यक्ति से कानूनी तौर पर तलाक ले चुकी है। अदालत के सख्त आदेशों के तहत महिला की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी गई है, ताकि वह समाज में बिना किसी डर के सामान्य जीवन जी सके। पुलिस चार्जशीट के अनुसार, यह प्रताड़ना साल 2022 में शुरू हुई थी और अक्टूबर 2025 तक लगातार चलती रही। जब प्रताड़ना की हर सीमा पार हो गई, तो महिला ने हिम्मत जुटाई और पुलिस थाने पहुंच कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उस पर रेप, जबरन संबंध बनवाने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप तय किए गए हैं।
इस खुलासे के बाद स्वीडन के समाज और मानवाधिकार संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। अभियोजन पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि आरोपी ने महिला की लाचारी, उसकी कमजोर स्थिति और उसके डर का पूरा फायदा उठाया। उसने पीड़िता को डराने के लिए पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने और उसकी उंगलियां काटने तक की धमकियां दी थीं। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकील और खुद आरोपी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आरोपी का तर्क है कि जो कुछ भी हुआ, वह दोनों की आपसी सहमति से हुआ था और उसने सिर्फ इंटरनेट के जरिए पुरुषों को घर बुलाने में अपनी पत्नी की मदद की थी। पुलिस ने अब तक उन 120 पुरुषों की पहचान कर ली है, जो उस फार्महाउस पर गए थे। इनमें से 28 के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है, हालांकि ज्यादातर आरोपियों ने किसी भी तरह के अपराध में शामिल होने से इनकार किया है।
इस पूरे मामले की नियमित सुनवाई स्वीडन के पूर्वी तट पर स्थित हर्नोसांड शहर की अदालत में शुक्रवार को शुरू हो चुकी है। मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता की निजता को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश ने पूरी सुनवाई को बंद कमरे (इन-कैमरा प्रोसीडिंग) में करने का अहम फैसला लिया है। जांच अधिकारी उन तमाम वीडियो क्लिप्स को डिजिटल सबूत के तौर पर अदालत में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं, जो आरोपी ने खुद अपने निगरानी कैमरों से रिकॉर्ड किए थे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस केस की तुलना फ्रांस के चर्चित डोमिनिक पेलिको मामले से की जा रही है, जिसमें डोमिनिक पेलिको ने अपनी पत्नी को नशे की दवा देकर कई सालों तक अन्य पुरुषों से रेप करवाया था। स्वीडन पुलिस अब उन बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी कर रही है, जिनकी पहचान तो हो चुकी है लेकिन वे अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
यह घटना इंटरनेट और ऑनलाइन डेटिंग प्लेटफॉर्म्स के उस खतरनाक पक्ष को भी उजागर करती है, जहां अपराधी बहुत ही आसानी से अपने शिकार या ग्राहकों तक पहुंच बना लेते हैं। सुनसान फार्महाउस का उपयोग यह दर्शाता है कि अपराधी किस तरह समाज और कानून की नजरों से बचकर अपने नेटवर्क को संचालित करते हैं। इसके अलावा, यह घरेलू हिंसा और वैवाहिक जीवन में शोषण का एक ऐसा क्रूर उदाहरण है, जो सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। इंटरनेट पर गुमनामी का फायदा उठाकर किए जाने वाले इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए साइबर निगरानी को और भी अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। साथ ही, महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और हेल्पलाइन्स के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है, ताकि वे समय रहते ऐसी प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठा सकें।
Published on:
13 Apr 2026 03:30 pm
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