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US Election Cyber Attack: क्या आपका वोट वाकई आपका है? ट्रम्प के खुलासे से उठा पर्दा-विदेशी हैकर्स के एक कोड की दूरी पर है दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र

US Election Hacking News : क्या आपका वोट वाकई सुरक्षित है? महाशक्तियों के डिजिटल चक्रव्यूह में फंसी दुनिया की सबसे पुरानी डेमोक्रेसी। जानिए कैसे रूस, चीन और उत्तर कोरिया के हैकर्स एक क्लिक से बदल सकते हैं सत्ता का रुख।
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भारत

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Manoj Vashisth

Jul 17, 2026

Donald Trump Election Fraud

Donald Trump Election Fraud : ट्रम्प का दावा: रूस, चीन और ईरान के साइबर हमलों के निशाने पर अमेरिकी चुनावी प्रणाली (सोर्स:X@RealAmVoice)

Donald Trump Election Fraud: दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश और उसकी चुनावी प्रणाली क्या पूरी तरह सुरक्षित है? पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक ताजा और बेहद आक्रामक बयान ने इस पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। ट्रम्प ने सीधे तौर पर आगाह किया है कि अमेरिका का चुनावी ढांचा इस समय वैश्विक महाशक्तियों के साइबर निशाने पर है। उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र के दिल पर हुआ सीधा साइबर हमला है।

हाल ही में सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेजों का हवाला देते हुए ट्रम्प ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने दावा किया कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश, और कई अनाम हैकर समूह (नॉन-स्टेट एक्टर्स) अमेरिकी चुनाव प्रणालियों में सेंध लगाने की पूरी क्षमता रखते हैं। ट्रम्प के इस खुलासे ने वॉशिंगटन से लेकर बीजिंग तक हड़कंप मचा दिया है।

जनता से छिपाया गया सच, ईवीएम में हैं खामियां

ट्रम्प ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी नागरिकों को सालों तक चुनाव सुरक्षा के नाम पर धोखे में रखा गया। डीक्लासिफाइड (सार्वजनिक) की गई तीसरी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,"चीन के दखल को छिपाना तो सिर्फ शुरुआत थी। सच यह है कि सालों से अमेरिकी जनता से झूठ बोला गया। हमारी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) और बैलेट काउंटिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और इन्हें आसानी से हैक या प्रभावित किया जा सकता है।

अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी के आकलन के अनुसार, चुनाव से जुड़े सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस सबसे कमजोर कड़ी हैं। इनमें वोटर रजिस्ट्रेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक पोलबुक्स और आधिकारिक चुनाव वेबसाइटें शामिल हैं, जिन्हें निशाना बनाकर पूरी मतदान प्रक्रिया को ठप या प्रभावित किया जा सकता है।

वेनेजुएला के चुनावी खेल का भी पर्दाफाश

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए ट्रम्प ने सीआईए (CIA) की एक गोपनीय रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला की मादुरो सरकार ने साल 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में डिजिटल हेरफेर की एक सोची-समझी साजिश रची थी। सीआईए को इस साजिश के पुख्ता इनपुट मिले थे कि कैसे वहां चुनावों को डिजिटली प्रभावित किया गया। ट्रम्प प्रशासन द्वारा जारी किए गए ये खुफिया दस्तावेज जनवरी 2020 से लेकर जून 2026 तक की अवधि के हैं, जो साइबर सुरक्षा की पोल खोलते हैं।

चुनावी साइबर वॉरफेयर का इतिहास और खतरा

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप की बात सामने आई है। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के दौर में युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि सर्वर रूम्स में लड़े जा रहे हैं:

2016 का सबक: 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के 'फैंसी बीयर' (Fancy Bear) जैसे हैकर ग्रुप्स पर डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के सर्वर हैक करने के गंभीर आरोप लगे थे।

रैंसमवेयर और मैलवेयर का जाल: हाल के वर्षों में दुनिया भर के चुनाव आयोगों को 'डीडीओएस' (DDoS - डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमलों का सामना करना पड़ा है, जिससे चुनावी वेबसाइट्स क्रैश हो जाती हैं और जनता में भ्रम फैलता है।

डीपफेक और एआई का नया खतरा: 2026 के इस दौर में अब सिर्फ मशीन हैक करना ही चुनौती नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक वीडियो के जरिए मतदाताओं की सोच को प्रभावित करना (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) सबसे बड़ा साइबर खतरा बन चुका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों ने अपनी चुनावी तकनीक को 'क्वांटम-सुरक्षित' (Quantum-Resistant) और अभेद्य नहीं बनाया, तो मतपेटी से निकलने वाला जनादेश जनता का नहीं, बल्कि किसी विदेशी हैकर का फैसला होगा।