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फेडरल रिजर्व को ट्रंप का अल्टीमेटम, बोले-रेट कम करो वरना उनके साथ व्यापार रोक दूंगा

ट्रंप ने फेडरल रिजर्व को धमकी दी कि दरें न घटीं तो व्यापार घाटे वाले देशों से व्यापार बंद कर देंगे। जानें अगस्त जॉब्स रिपोर्ट, फेड चीफ वार्श के बयान और बाजार पर असर से जुड़ी पूरी खबर।
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Trump tariffs

जॉब्स रिपोर्ट के बाद भड़के ट्रंप, फेड को दी सीधी चेतावनी ,photo credit: ANI

Trump Trade Threat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फेडरल रिजर्व पर दबाव बढ़ाते हुए साफ चेतावनी दी कि अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दरें नहीं घटाता, तो वे अमेरिका के व्यापार घाटे वाले सभी देशों के साथ व्यापार बंद कर देंगे। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में फेड और उसके चेयरमैन केविन वार्श से ब्याज दरें घटाने की मांग करते हुए यह चेतावनी दी।

मजबूत नौकरी रिपोर्ट बनी वजह

यह बयान अगस्त महीने की उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत नौकरी रिपोर्ट आने के तुरंत बाद आया। अगस्त में 1,62,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमानित करीब 55,000 से लगभग तीन गुना ज्यादा है, जबकि बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर रही। इस मजबूत आंकड़े ने बाजार की धारणा को उलट दिया है।

बाजार की उलट प्रतिक्रिया

दिलचस्प बात यह है कि बाजार ने ट्रंप की मांग के ठीक उलट प्रतिक्रिया दी। इस मजबूत नौकरी रिपोर्ट से फेड अधिकारियों के अगली नीतिगत बैठक में दरें बढ़ाने का पक्ष मजबूत हो सकता है, जो 15 सितंबर से शुरू होने वाली है। रिपोर्ट के बाद 10 साल के ट्रेजरी यील्ड एक साल के उच्चतम स्तर 4.79% पर पहुंच गए, जो दर्शाता है कि निवेशक ज्यादा नहीं बल्कि कम दर कटौती की उम्मीद कर रहे हैं।

फेड चेयरमैन का सख्त रुख

गौरतलब है कि केविन वार्श, जिन्हें ट्रंप ने खुद फेड चेयरमैन नियुक्त किया था, हाल ही में सख्त रुख अपनाते नजर आए। जैक्सन होल संगोष्ठी में वार्श ने चेतावनी दी थी कि अगर महंगाई लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है तो फेड को अभी और काम करना है, जिसे दरें बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा गया।

कहां-कहां सबसे बड़ा व्यापार घाटा

व्यापार घाटे के मामले में, पिछले साल अमेरिका का चीन के साथ सबसे बड़ा व्यापार घाटा 200 अरब डॉलर से ज्यादा रहा, इसके बाद मेक्सिको और वियतनाम का स्थान रहा, जबकि सभी व्यापारिक साझेदारों के साथ कुल घाटा 1.2 ट्रिलियन डॉलर था।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर ट्रंप वाकई इस धमकी पर अमल करते हैं, तो इसका असर सिर्फ ब्याज दरों की बहस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, कॉर्पोरेट राजस्व और उपभोक्ता कीमतों पर भी गहरा असर पड़ सकता है, जिससे मामला फेड की स्वतंत्रता से जुड़े एक बड़े आर्थिक-राजनीतिक टकराव में बदल सकता है।

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