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जंग के बीच ट्रंप का ‘टैरिफ बम’! विदेशी दवाओं पर लगाया 100% टैक्स, क्या अब महंगी होंगी भारतीय दवाएं?

Trump Tariffs: देशों पर पारस्परिक व्यापार शुल्क लगाने के एक साल बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब पेटेंट वाली दवाइयों के आयात पर नए शुल्क लगा दिए हैं।

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Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-IANS)

Trump Pharma Tariffs: ट्रंप प्रशासन ने पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल इंपोर्ट्स पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। इसका मकसद अमेरिका में दवा उत्पादन बढ़ाना और सप्लाई चेन को सुरक्षित करना बताया गया है। जेनेरिक दवाएं फिलहाल छूट में हैं, जिससे भारतीय फार्मा सेक्टर को तत्काल बड़ा झटका नहीं लगेगा, लेकिन लंबे समय में अनिश्चितता बढ़ गई है।

ट्रंप ने विदेशी दवाओं पर लगाया 100 प्रतिशत टैरिफ

3 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेक्शन 232 के तहत पेटेंटेड दवाओं और उनके एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) पर 100% टैरिफ लगाने का एक्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया। यह कदम नेशनल सिक्योरिटी और ग्लोबल सप्लाई चेन रिस्क को कम करने के लिए उठाया गया है। बड़े कंपनियों को 120 दिनों और छोटी कंपनियों को 180 दिनों में अमेरिका में प्रोडक्शन शिफ्ट (रिशोरिंग) के लिए कमिटमेंट करने का समय दिया गया है।

क्या इससे भारत पर असर पड़ेगा?

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि विदेशी पेटेंटेड दवाओं पर भारी निर्भरता अमेरिका की सेहत और सुरक्षा के लिए खतरा है। जिन कंपनियों ने 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' प्राइसिंग डील साइन की है और अमेरिका में फैक्ट्री बना रही हैं, उन्हें टैरिफ से राहत मिल सकती है। यूरोपीय संघ, जापान, साउथ कोरिया और स्विट्जरलैंड जैसे देशों को 15% टैरिफ, जबकि ब्रिटेन को 10% की छूट का प्रावधान है।

भारत पर क्या असर?

भारतीय फार्मा उद्योग के लिए तत्काल राहत की खबर है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को भारत की कुल फार्मा एक्सपोर्ट का करीब 90% जेनेरिक दवाओं का है। 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 बिलियन डॉलर की दवाएं निर्यात कीं, जो उसके वैश्विक फार्मा एक्सपोर्ट का 38% है। जेनेरिक दवाएं फिलहाल टैरिफ से मुक्त हैं, इसलिए भारतीय कंपनियों के मुख्य बिजनेस पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।

हालांकि, लंबे समय में चुनौतियां हैं। कुछ भारतीय कंपनियां ब्रांडेड या स्पेशलिटी ड्रग्स बनाती हैं या पेटेंटेड दवाओं के लिए इंटरमीडिएट्स सप्लाई करती हैं। कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और एपीआई सप्लाई पर असर पड़ सकता है। बायोकॉन लिमिटेड के सीईओ सिद्धार्थ मित्तल ने कहा, जेनेरिक्स पर छूट से तत्काल बड़ा असर नहीं है, लेकिन यह पॉलिसी अनिश्चितता पैदा करती है। बढ़ता प्रोटेक्शनिज्म उद्योग के लिए चिंता का विषय है।

व्हाइट हाउस के एक सीनियर अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जेनेरिक्स बहुमत में हैं, इसलिए छूट है, लेकिन कॉमर्स डिपार्टमेंट जेनेरिक्स के रिशोरिंग की समीक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर टैरिफ दोबारा लागू कर सकता है।