
Trump Reacts to Reports of China-Iran Missile Deal: 'यह हैरान करने वाला है': चीन-ईरान मिसाइल डील की रिपोर्ट पर बोले ट्रंप (फोटो सोर्स:@CBSNews)
QW-12 Missile System : अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन द्वारा ईरान को अत्याधुनिक मिसाइल लॉन्चर सप्लाई करने की खबरों पर कड़ा ऐतराज जताया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि बीजिंग ने तेहरान को हथियारों की आपूर्ति की, तो यह उनके लिए बेहद निराशाजनक होगा। इस बयान ने न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि आगामी सितंबर में प्रस्तावित चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमरीकी यात्रा पर भी अनिश्चितता के काले बादल मंडरा दिए हैं।
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इस रिपोर्ट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
"यह खबर वास्तव में हैरान करने वाली है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मुझसे बहुत मजबूती से वादा किया था कि वे इसमें भाग नहीं लेंगे। उन्हें भली-भांति पता है कि अगर ऐसा हुआ तो मुझे कितनी निराशा होगी।"
ट्रंप के इस सख्त लहजे के पीछे राष्ट्रपति शी जिनपिंग का 24 सितंबर को होने वाला अमरीकी दौरा भी है। ट्रंप ने याद दिलाया कि चीनी नेतृत्व ने उन्हें पहले भी लिखित आश्वासनों में भरोसा दिया था कि बीजिंग ईरान को सैन्य हथियार नहीं भेज रहा है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान और चीन के बीच कंधे पर रखकर दागी जाने वाली 400 'शॉल्डर-फायर' एयर-डिफेंस मिसाइल प्रणालियों (MANPADS) का सौदा हुआ है।
कुल लागत: 60 से 70 मिलियन डॉलर (लगभग 500 से 580 करोड़ रुपये)
मिसाइल मॉडल: QW-12 और FN-16 एयर डिफेंस सिस्टम
मध्यस्थ कंपनी: हांगकांग स्थित 'झोंगकिंग बाओशांग इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट'
उद्देश्य: अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान की कम दूरी की हवाई सुरक्षा को मजबूत करना।
जमीनी स्तर पर ये मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लड़ाकू विमानों, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को पलक झपकते ही तबाह करने की क्षमता रखती हैं।
चीन के विदेश मंत्रालय ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से निराधार करार दिया है। चीन का कहना है कि वह हमेशा से शांति और संघर्ष को समाप्त करने के पक्ष में रहा है।
हालांकि, अमरीकी खुफिया और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही चीन सीधे तौर पर हथियार न बेचे, लेकिन वह 'डुअल-यूज़' (दोहरे उपयोग वाली) तकनीक की आपूर्ति लगातार कर रहा है। ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि जो भी देश युद्ध के बीच ईरान को सैन्य मदद देगा, उस पर अमरीका 50% तक का भारी आर्थिक टैरिफ थोप देगा।
ईरान और अमरीका के बीच जारी सैन्य तनातनी के दौर में यह खबर रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकती है। ईरान अपनी कमजोर हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए चीनी तकनीक पर भरोसा जता रहा है, वहीं अमरीका इसे सीधे तौर पर रेड-लाइन पार करने जैसा मान रहा है।
अब पूरी दुनिया की नजरें 24 सितंबर को वाशिंगटन में होने वाली संभावित ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात पर टिकी हैं। अगर अमरीकी दावों के मुताबिक मिसाइलों की पहली खेप आने वाले हफ्तों में तेहरान पहुँचती है, तो यह मुलाकात होने से पहले ही रद्द हो सकती है या फिर एक नए 'ट्रेड वॉर' की शुरुआत कर सकती है।
Updated on:
30 Jul 2026 10:04 am
Published on:
30 Jul 2026 09:31 am
