
इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान। (फोटो- ANI)
इजराइल और लेबनान के बीच सीजफायर लागू है। इसके बावजूद, एक दिन पहले इजराइल ने लेबनान को खुली धमकी दी थी। इस विवाद के बीच लेबनान की ओर से तुर्की ने बयान जारी किया है।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि इजराइल सुरक्षा की आड़ में लेबनान में और जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है।
फिदान ने अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम में खुलकर कहा- इजराइल अपनी सुरक्षा के पीछे नहीं है। इजराइल और जमीन चाहता है। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार सुरक्षा का इस्तेमाल और जमीन पर कब्जा करने के बहाने के तौर पर कर रही है।
बता दें कि लेबनान के साथ सीजफायर के बावजूद, इजराइली रक्षा मंत्री काट्ज ने कहा कि इजराइल दक्षिणी लेबनान में उन सभी जगहों पर अपना कब्जा बनाए रखेगा जिन्हें उसने साफ किया और अपने कब्जे में लिया था।
काट्ज ने यह भी चेतावनी भी दी कि लेबनान में इजराइल का सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि लेबनानी गुट हिज्बुल्लाह को किसी न किसी तरह निहत्था कर दिया जाएगा।
उधर, इजराइल की उत्तरी सीमा पर रहने वाले लोगों ने लेबनान के साथ सीजफायर की निंदा की है। उनका कहना है कि यह केवल ईरान के सामने ही नहीं, बल्कि अमेरिका के सामने भी घुटने टेकने जैसा है।
कुछ लोगों का कहना है कि वे चाहते थे कि नेतन्याहू सीजफायर की संभावना के बारे में ज्यादा खुलकर बात करते। इसके बजाय उन्हें यह बात सीधे अमेरिका से पता चली।
लोगों ने कहा- नेतन्याहू अपने दोस्त डोनाल्ड ट्रंप के बारे में काफी खुलकर बात करते रहे हैं। इसलिए, भले ही उन पर काफी दबाव रहा हो, लेकिन इससे उनके आपसी रिश्तों पर कोई खास बुरा असर नहीं पड़ा है।
फौजी जानकारों की इस मामले पर राय थोड़ी अलग है। उनका कहना है कि भले ही इजराइल को अभी दक्षिणी लेबनान में अपनी बढ़त रोकनी पड़ रही हो, लेकिन उसने पहले ही काफी अहम रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है।
उसने जिसे 'येलो लाइन ऑफ सिक्योरिटी' नाम दिया है, उसे हासिल कर लिया है। यह रेखा सीमा से कुछ जगहों पर 10 किलोमीटर (6।2 मील) तक अंदर तक फैली हुई है।
इससे उसे टैंक-रोधी हमलों की एक पूरी लाइन पर नियंत्रण मिल जाता है। इसका मतलब है कि वह लेबनान के अंदर तक अपनी भारी तोपें और बख्तरबंद गाड़ियां ले जा सकता है।
Published on:
18 Apr 2026 02:57 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
