
पाकिस्तान का झंडा। (फाइल फोटो- एएनआई)
ब्रिटेन में एक ऐसा काला अध्याय खुला है जिसे पढ़कर किसी का भी कलेजा कांप जाएगा। पाकिस्तानी मूल के कुछ गिरोहों ने 1990 के दशक से लेकर 2010 तक नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाया।
ज्यादातर सफेद और सिख समुदाय की लड़कियां रहीं। ये बच्चियां 11 साल की भी नहीं थीं, लेकिन गिरोहों ने उन्हें पार्क, बस स्टॉप और स्कूल के बाहर फुसलाया।
चापलूसी, शराब, ड्रग्स या छोटे-मोटे तोहफे देकर उनका भरोसा जीता। फिर उन्हें फ्लैट्स या टेकअवे में ले जाकर दोस्तों के बीच बांट दिया। बार-बार बलात्कार, धमकियां और मारपीट भी गई।
हाल ही में हाउंसलो में सिख समुदाय ने दिखाया कि जब सिस्टम फेल हो जाए तो लोग खुद आगे आ जाते हैं। करीब 200 लोग एक रैली में जुटे और 16 साल की एक लड़की को छुड़ाया।
34 साल का एक पाकिस्तानी मूल का शख्स उसे अगवा करके रखे हुए था। पुलिस ने कुछ नहीं किया, तो समुदाय ने मोर्चा संभाला। यह घटना पूरे ग्रूमिंग स्कैंडल की तस्वीर साफ करती है।
पूरे ब्रिटेन में ऐसे सैकड़ों मामले हैं जहां गरीब घरों या अनाथालय की लड़कियों को टारगेट किया गया। गिरोह वाले टैक्सी ड्राइवर, डिलीवरी बॉय या दुकानदार बनकर घूमते थे।
रात में जब नजर कम होती, तब अपना खेल शुरू करते। लड़कियों को धमकाते कि वीडियो वायरल कर देंगे, घर जला देंगे या मार डालेंगे। कई लड़कियों की जिंदगी हमेशा के लिए बिगड़ गई। कुछ गर्भवती हुईं, कुछ को मार दिया गया।
सबसे ज्यादा चर्चा रोथरहम की हुई। 1997 से 2013 तक यहां करीब 1400 लड़कियां शिकार बनीं। ज्यादातर अस्थिर परिवारों या केयर होम की। टैक्सी ड्राइवर उनकी दिनचर्या जानते थे और सीधे उन्हें उठा ले जाते।
1991 से रिपोर्ट्स आ रही थीं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। अब ऑपरेशन स्टोववूड चल रहा है। इसमें 1100 से ज्यादा पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और 2027 तक ट्रायल चलेंगे।
रोचडेल में 2012 में 9 लोगों को सजा मिली। वे प्री-टीन लड़कियों को ट्रैफिक करते थे। एक लड़की पर रात में 20 आदमी तक आते थे। 2025 में फिर 7 लोगों को 174 साल की सजा मिली।
टेलफोर्ड में 1970 के दशक से 1000 तक लड़कियां शिकार हुईं। गरीबी का फायदा उठाया गया। ऑक्सफोर्ड के Operation Bullfinch में 22 लोग दोषी ठहरे। हडर्सफील्ड में 20 लोगों ने 11 साल की उम्र की 120 से ज्यादा लड़कियों पर बलात्कार किए। न्यूकैसल में भी दर्जनों गिरफ्तारियां हुईं।
ग्रेटर मैनचेस्टर के आंकड़े और भी चौंकाते हैं। ग्रुप चाइल्ड एब्यूज के 52 प्रतिशत मामले एशियाई, मुख्यतः पाकिस्तानी मूल के लोगों के थे।
इतने सालों तक ये सब चलता रहा क्योंकि रिपोर्ट्स को नजरअंदाज किया गया। कंजर्वेटिव सांसद केटी लाम अब नेशनल इंक्वायरी की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि अब पीड़ितों की आवाज सुननी होगी।
खालसा वॉक्स की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि समुदायों को अब डेटा, ट्रेनिंग और पीड़ितों की बात माननी होगी। पुलिस को भी अपनी गलतियों से सीखना होगा। पीड़ित अब खुद आगे आ रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए।
Updated on:
09 Apr 2026 10:13 pm
Published on:
09 Apr 2026 10:13 pm
