
अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस। (फोटो: ANI )
US Ends Ukraine War Funding: अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने यूक्रेन युद्ध के लिए फंडिंग (US Ends Ukraine funding) रोकने की घोषणा की है। उनका यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ( Putin) के बीच अलास्का शिखर सम्मेलन (Alaska peace summit) की तैयारियां हो रही हैं। इस बैठक का मकसद रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए एक शांति समझौता करना है। ट्रंप-पुतिन के बीच अलास्का में प्रस्तावित बैठक से युद्धविराम की उम्मीद की जा रही है।
जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा: "हमने यूक्रेन युद्ध का कारोबार बंद कर दिया है। अब हमारा लक्ष्य शांति है, न कि संघर्ष का विस्तार।" यह बयान अमेरिकी जनता की उस भावना दर्शाता है जो लंबे समय से युद्ध के लिए अमेरिकी टैक्स का पैसा खर्च किए जाने का विरोध कर रही है।
अमेरिका और रूस के बीच होने वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य पूर्वी यूक्रेन पर रूस के नियंत्रण के बदले युद्धविराम की संभावना तलाशना है। क्रेमलिन ने हाल ही में ट्रंप प्रशासन को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें रूस ने दुश्मनी खत्म करने के बदले कुछ शर्तें रखी हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेन को वार्ता में शामिल नहीं किया गया, तो शांति की कोई भी उम्मीद निरर्थक होगी। हालांकि उन्हें सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया है, लेकिन व्हाइट हाउस और नाटो के अधिकारी त्रिपक्षीय बैठक की संभावना से इनकार नहीं कर रहे।
यूरोपीय देशों ने भी इस शांति योजना पर चिंता जताई है। वे मानते हैं कि इस तरह के किसी भी समझौते में यूक्रेन और यूरोप की सुरक्षा प्राथमिक होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने ट्रंप के प्रयासों को समर्थन देने का वादा किया है – लेकिन अपने शर्तों पर।
वेंस ने दो टूक कहा कि अमेरिका अब यूक्रेन को हथियारों के लिए पैसा नहीं देगा। "अगर यूरोपीय देश अमेरिका से हथियार खरीदना चाहते हैं तो करें, लेकिन फंडिंग अब अमेरिका नहीं करेगा।"
यह पहली बार नहीं है जब वेंस ने यूरोपीय देशों से बड़ी जिम्मेदारी लेने की मांग की है। ट्रंप पहले ही नाटो देशों से GDP का 5% रक्षा खर्च के रूप में देने का प्रस्ताव रख चुके हैं।
हाल ही में जेडी वेंस ने इंग्लैंड की यात्रा की थी, जहां उन्होंने यूरोप के नेताओं से युद्ध के वित्त पोषण में अधिक भागीदारी की मांग की। उन्होंने कहा: "अगर आप इस युद्ध को लेकर इतने चिंतित हैं, तो आगे आइए और इसकी कीमत भी चुकाइए।"
बहरहाल अमेरिका की नई नीति अब युद्ध की जगह शांति और कूटनीति को प्राथमिकता दे रही है। अलास्का सम्मेलन इस दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है, बशर्ते यूक्रेन और यूरोप के हितों की अनदेखी न हो।
यूक्रेन सरकार ने अमेरिका के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कीव के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम न सिर्फ युद्ध में उनका समर्थन कमजोर करता है, बल्कि रूस को बढ़त भी दे सकता है। वहीं यूरोपीय संघ के कुछ नेताओं ने अमेरिका से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
क्या ज़ेलेंस्की को शिखर सम्मेलन में शामिल किया जाएगा? अमेरिकी व्हाइट हाउस और नाटो की ओर से यह संकेत दिए गए हैं कि शिखर वार्ता को त्रिपक्षीय रूप देने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए बैकचैनल डिप्लोमेसी शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के अमेरिकी चुनावों से पहले ट्रंप का यह शांति प्रयास उन्हें घरेलू मोर्चे पर बढ़त दिला सकता है। युद्ध से थके अमेरिकी मतदाताओं में यह संदेश जाएगा कि ट्रंप सिर्फ आक्रामक नहीं, डीलमेकर भी हैं।
Published on:
11 Aug 2025 06:26 pm
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