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Trump Iran warning : ट्रंप की ईरान को दो टूक, ‘धीमी बातचीत के लिए तेहरान को कीमत चुकानी पड़ेगी’

US-Iran Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को शांति वार्ता में देरी करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। मध्य पूर्व में बढ़ते हमलों के बीच कतर और तुर्की जैसे देश युद्ध रोकने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
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भारत

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MI Zahir

Jun 10, 2026

Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो- ANI)

US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में एक नया और बहुत चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। विदेशी मीडिया के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को दो टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि उसने समझौते की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा वक्त बर्बाद कर दिया है। ट्रंप के मुताबिक, बातचीत की इस सुस्त रफ्तार के लिए अब ईरान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि वे ईरान के खिलाफ क्या कदम उठाने जा रहे हैं, लेकिन उनके इस बयान ने मिडिल ईस्ट में चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बीच खलबली जरूर मचा दी है।

शांति की उम्मीदों के बीच क्यों भड़की चिंगारी ?

हैरानी की बात यह है कि अभी कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप का रुख अच्छा खासा और काफी सकारात्मक नजर आ रहा था। उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक समझौते के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्र में लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करना था। लेकिन अचानक बदले हुए इस सुर ने अंतरराष्ट्रीय जानकारों को भी चिंता में डाल दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत में कुछ बड़ा गतिरोध पैदा हुआ है।

ग्राउंड जीरो पर पलटवार और युद्धविराम पर संकट

ट्रंप की इस सख्त चेतावनी के पीछे जमीनी हालात भी एक बड़ी वजह हैं। शांति वार्ता की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव कम नहीं हो रहा है। दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ईरान के 'रिवोल्युशनरी गार्ड्स' ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी सेना ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की है। इस ताजा गोलाबारी ने पिछले कुछ महीनों से लागू अस्थायी युद्धविराम को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है। दोनों तरफ से हो रहे हमलों ने शांति की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा, मध्यस्थ देश सक्रिय

इस युद्ध का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। तेल आपूर्ति बाधित होने और व्यापारिक मार्ग प्रभावित होने के डर से दुनिया भर के बाजार सहमे हुए हैं। ऐसे में कतर, तुर्की और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश स्थिति को संभालने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। इन देशों की कोशिश है कि किसी भी तरह अमेरिका और ईरान को बातचीत की टेबल पर बनाए रखा जाए ताकि इस संकट का एक स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।

अब दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर जमी हुई

अब इस चेतावनी के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। क्या ईरान ट्रंप के इस दबाव के आगे झुकेगा या अपने परमाणु कार्यक्रम और सैन्य आक्रामकता और तेज करेगा? आने वाले दिनों में कतर और तुर्की में होने वाली मध्यस्थों की बैठकें यह तय करेंगी कि मध्य पूर्व शांति की ओर बढ़ेगा या फिर से किसी बड़े युद्ध की आग में झुलसेगा।