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लेबनान ने इजरायल के सामने रखी बड़ी शर्त, जानिए अमेरिका-ईरान वार्ता ठप होने की इनसाइड स्टोरी

Stalled: लेबनान ने इजरायली सेना की पूर्ण वापसी के बिना कोई भी समझौता करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी और अविश्वास के कारण ईरान के साथ शांति वार्ता पूरी तरह से ठप हो गई है।

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भारत

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MI Zahir

Apr 23, 2026

ईरान-इजरायल युद्ध (Video Screenshot)

Negotiation: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच शांति की कोशिशें लगातार उलझती जा रही हैं। वाशिंगटन डीसी में चल रही बातचीत में लेबनान ने इजरायल के सामने एक बेहद सख्त शर्त रख दी है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने पेरिस में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जब तक इजरायली सेना उनके क्षेत्र से पूरी तरह वापस नहीं लौट जाती, तब तक किसी भी शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। लेबनान ने इजरायल के 'बफर जोन' बनाने के विचार को भी सिरे से ठुकरा दिया है। उनका साफ कहना है कि ऐसा कोई समझौता मंजूर नहीं जिसमें विस्थापित लेबनानी नागरिक अपने तबाह हो चुके गांवों और घरों में वापस न लौट सकें। लेबनान को उम्मीद है कि अमेरिका इस मामले में इजरायल पर कूटनीतिक दबाव बनाएगा।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पर भी टिकी हैं नजरें

दूसरी तरफ, दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पर भी टिकी थीं, जो फिलहाल पूरी तरह अधर में लटक गई है। इस वार्ता के ठप होने की इनसाइड स्टोरी काफी दिलचस्प है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका द्वारा उनके बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक घेराबंदी को इस विफलता का मुख्य कारण बताया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का स्पष्ट कहना है कि तेहरान बातचीत और सहमति के पक्ष में है, लेकिन अमेरिकी धमकियां और आर्थिक घेराबंदी असली रुकावट हैं।

इस मुद्दे पर ईरान पूरी तरह एकजुट

तनाव के बीच ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो विदेशी जहाजों को भी कब्जे में लिया है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की रणनीतियों के कारण दोनों देशों के बीच अविश्वास बहुत गहरा हो गया है। अमेरिका यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि ईरानी नेतृत्व बंटा हुआ है, लेकिन असल में ईरान इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट है।

हिजबुल्लाह ने इजरायल के साथ बातचीत को एक 'बड़ी गलती' करार दिया

इन तमाम घटनाक्रमों पर क्षेत्रीय नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हिजबुल्लाह के वरिष्ठ सांसदों और नेताओं ने इजरायल के साथ सीधी बातचीत को एक 'बड़ी गलती' करार दिया है। हिजबुल्लाह का कहना है कि यदि इजरायल सीजफायर का पूरी तरह से पालन नहीं करता है, तो वे किसी भी समझौते से बंधे नहीं रहेंगे। वहीं, हथियारों को सौंपने की इजरायली मांग पर लेबनानी सांसदों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह रातों-रात संभव नहीं है।

लेबनानी कैदियों की रिहाई बातचीत के अगले दौर का मुख्य एजेंडा रहेगा

आगामी बैठकों की बात करें तो लेबनान वाशिंगटन वार्ता में एक महीने के युद्धविराम विस्तार की मांग करने जा रहा है। इसके अलावा, दक्षिणी लेबनान के गांवों में इजरायल द्वारा घरों को गिराए जाने पर तुरंत रोक लगाने की मांग की जाएगी। इजरायली सेना की पूर्ण वापसी, सीमा पर लेबनानी सेना की तैनाती, लेबनानी कैदियों की रिहाई और पुनर्निर्माण का काम शुरू करना बातचीत के अगले दौर का मुख्य एजेंडा रहेगा।

यूएन ने पत्रकार की मौत को टारगेटेड किलिंग बताया

बहरहाल, इस कूटनीतिक हलचल और राजनीतिक दांव-पेंच के बीच दक्षिणी लेबनान में एक दर्दनाक घटना भी घटी है। इजरायली हवाई हमले में लेबनानी पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई है। जब यह हमला हुआ, तब वे अपने सहयोगी के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रही थीं। संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने इस घटना को टारगेटेड किलिंग बताया है। इस दुखद घटना के बाद पूरे लेबनान और अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।