23 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

US Iran War: अमेरिकी जनरल ने चेताया-सिर्फ एयरस्ट्राइक से नहीं जीते जा सकते युद्ध, ट्रंप प्रशासन ढूंढ रहा ‘एग्जिट प्लान’

US Iran War:इजराइल-ईरान तनाव के बीच अमेरिकी जनरल ने चेताया है कि केवल एयरस्ट्राइक से युद्ध नहीं जीते जा सकते। ट्रंप प्रशासन अब इस संघर्ष से बाहर निकलने के लिए कूटनीतिक 'एग्जिट प्लान' की तलाश में जुटा है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

kamlesh sharma

•

Updated: 8 Aug 2026, 10:36 AM IST

Iran vs US War

Iran vs US War: अमेरिका! तेहरान बोला- हमला हुआ तो जवाब की कोई सीमा नहीं (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

वाशिंगटन। अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी सेना के शीर्ष नेतृत्व ने इस संघर्ष को कम करने और इसका कोई कूटनीतिक समाधान खोजने का रास्ता ढूंढ रहा है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन कैन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा दल के सामने चिंता जताई है कि केवल हवाई हमलों के दम पर ईरान को वाशिंगटन की शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट के मुताबिक जनरल अब इस जंग से निकलने का रास्ता यानी 'ऑफ-रैंप' खोज रहे हैं।

सेना की सुरक्षा और क्षमताओं की सीमा

जनरल डैन केन ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निजी बातचीत में चिंता जताई है कि सैन्य तनाव बढ़ाने का फैसला उल्टा पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, जनरल केन का यह रुख मुख्य रूप से अमरीकी सेना को एक लंबे और बिना किसी स्पष्ट नतीजे वाले युद्ध से बचाने की कोशिश है। उन्होंने पूर्व में भी अमेरिकी सांसदों को स्पष्ट किया था कि हवाई ताकत की अपनी सीमाएं होती हैं।

ट्रंप की रणनीति और जमीनी हकीकत

राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ईरान में अमरीकी जमीनी सेना तैनात का विरोध करते रहे हैं। उनका मानना रहा है कि लगातार बमबारी के दबाव से तेहरान को समझौते की मेज पर लाया जा सकता है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारी इस रणनीति की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान से जुड़ी बातचीत में प्रगति हो रही है और यह संघर्ष 'जल्द ही खत्म' हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि दुनिया के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग पर बना यह तनाव वैश्विक ईंधन कीमतों को भी प्रभावित कर रहा है।

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान का रक्षा समझौता

पश्चिमी एशिया में युद्ध के बीच सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसे एक तरह का इस्लामिक नाटो माना जा रहा है। इसके तहत तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। तीनों देशों में पाकिस्तान एकमात्र परमाणु संपन्न देश है, जबकि तुर्किए तकनीकि रूप से मजबूत होने के साथ ही नाटो देशों में अमरीका के बाद दूसरी बड़ी सेना है। सऊदी आर्थिक रूप से समद्ध है। बीते साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने इसी तरह का रक्षा समझौता किया था।

कागजी समझौता सुरक्षा नहीं दे सकता: ईरान

संयुक्त रक्षा समझौता को लेकर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य इब्राहिम रजाई ने 'एक्स' पर लिखा कि सऊदी अरब को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि तुर्किए व पाकिस्तान के साथ किया गया यह कागजी समझौता उन्हें सुरक्षा नहीं दिला सकता। सऊदी अरब अफनी नीति में सुरक्षा करे तो उसे सुरक्षा की भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

बड़ी खबरें

View All

विदेश

ट्रेंडिंग

US Israel Iran War