
Donald Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo- IANS)
US Judge on H-1B visa fee plan: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों को अदालत से झटका लगा है। एक संघीय अदालत ने उस प्रस्ताव पर रोक लगा दी है, जिसके तहत H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों पर 1 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 96 लाख रुपए) तक का अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था की गई थी। अदालत के इस फैसले को अमेरिकी कंपनियों के साथ-साथ H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में रोजगार की तैयारी कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए भी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश रिचर्ड स्टर्न्स ने सोमवार को अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार का शुल्क लागू करने की प्रक्रिया अमेरिकी संविधान में निर्धारित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है। अदालत के अनुसार, कर या शुल्क तय करने का अधिकार मुख्य रूप से अमेरिकी कांग्रेस के पास है। ऐसे में कार्यपालिका द्वारा सीधे इस तरह की वित्तीय बाध्यता लागू करना संवैधानिक प्रश्न खड़े करता है। यह शुल्क सितंबर 2025 में जारी राष्ट्रपति की घोषणा के बाद अमेरिकी विदेश विभाग और गृह सुरक्षा विभाग (DHS) की ओर से लागू किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले का भी उल्लेख किया। न्यायाधीश स्टर्न्स ने कहा कि राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा से जुड़े हालिया न्यायिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इस मामले का मूल्यांकन किया गया। गौरतलब है कि इससे पहले एक अन्य संघीय अदालत ने समान प्रकृति के मामले में प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन बाद के कानूनी घटनाक्रमों ने स्थिति बदल दी।
इस प्रस्ताव का कई कारोबारी संगठनों और राज्य सरकारों ने विरोध किया था। आलोचकों का कहना था कि इतनी बड़ी अतिरिक्त फीस से विदेशी विशेषज्ञों की भर्ती महंगी हो जाती, जिससे तकनीक, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ सकता था। विरोध करने वाले पक्षों ने यह भी तर्क दिया कि शुल्क लागू करने और छूट देने के अधिकारों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं थी, जिससे नीति के मनमाने उपयोग की आशंका पैदा हो सकती थी।
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से H-1B वीजा कार्यक्रम में बदलाव की वकालत करता रहा है। इस संबंध में प्रशासन का तर्क रहा है कि कुछ कंपनियां कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति कर अमेरिकी नागरिकों के रोजगार अवसरों को प्रभावित करती हैं। इसी आधार पर प्रशासन ने H-1B प्रणाली को अधिक कठोर बनाने और कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक दायित्व डालने की कोशिश की थी।
H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को अस्थायी तौर पर नियुक्त करने की अनुमति देता है। अमेरिकी कानून के तहत इसकी वार्षिक सीमा 65,000 निर्धारित है, जबकि अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त उम्मीदवारों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा उपलब्ध कराए जाते हैं। भारतीय आईटी और तकनीकी क्षेत्र के पेशेवर इस वीजा श्रेणी के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं। ऐसे में अदालत के इस फैसले को भारत से अमेरिका जाने वाले कुशल पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Updated on:
09 Jun 2026 02:59 am
Published on:
09 Jun 2026 02:58 am
