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पीएम मोदी ने कहा था- मैं आपसे मिलने आ सकता हूं? टैरिफ विवाद के बीच ट्रंप ने फिर साधा निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके अच्छे संबंध हैं, लेकिन भारत पर लगाए गए टैरिफ के कारण मोदी उनसे खुश नहीं हैं।

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भारत

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Mukul Kumar

Jan 07, 2026

Donald Trump and PM Modi

पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (AI Generated Image)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को लेकर एक और बयान जारी है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके बहुत अच्छे संबंध हैं लेकिन भारत पर लगाए गए बहुत ज्यादा टैरिफ के कारण वह उनसे (ट्रंप से) ज्यादा खुश नहीं हैं।

ट्रंप ने कहा- प्राइम मिनिस्टर मोदी मेरे पास आए और बोले- क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?' इसके जवाब में मैंने कहा- बिल्कुल। हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। लेकिन वे मुझसे अब इतने खुश नहीं हैं क्योंकि अब वे काफी टैरिफ दे रहे हैं।

भारत ने रूस से तेल खरीद में काफी कमी कर दी है- ट्रंप

ट्रंप ने भारत और रूस के संबंधों के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीद के कारण ज्यादा टैरिफ लगाने के बाद अब भारत ने रूस से तेल खरीद में काफी कमी कर दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों के साथ बैठक में हथियारों की आपूर्ति में देरी के संदर्भ में भी बयान जारी किया।

ट्रंप ने दावा किया कि मोदी ने उनसे मुलाकात में भारत को अपाचे हेलिकॉप्टर की आपूर्ति में देरी पर बात की थी। भारत ने अमेरिका से 68 अपाचे हेलिकॉप्टर का सौदा किया था लेकिन पांच साल में उसकी आपूर्ति नहीं हुई।

मैं किंग, मुझे बोइंग दे सेल्समैन ऑफ द ईयर का अवार्ड

बैठक में ट्रंप ने कहा कि अमरीकी हथियार सबसे अच्छे हैं लेकिन वह मिलने में देरी होती है। उन्होंने रक्षा उत्पादकों से कहा है कि समय पर आपूर्ति करें। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में बोइंग की सबसे ज्यादा बिक्री हुई है, वह किंग हैं और बोइंग को उन्हें सेल्समैन ऑफ द ईयर का पुरस्कार देना चाहिए।

अमेरिकी लॉबी फर्म के दस्तावेज में ट्रंप की मध्यस्थता का जिक्र नहीं

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संघर्ष विराम के राष्ट्रपति ट्रंप के झूठे दावों की अमेरिकी फर्म ने ही हवा निकाल दी। ट्रंप के पूर्व सलाहकार जेसन मिलर के नेतृत्व वाली अमेरिका की लॉबिंग फर्म एसएचडब्लू पार्टनर्स एलएलसी की ओर से अमेरिकी प्रशासन को सौंपे तीन पेज के दस्तावेज में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अमेरिकी मध्यस्थता की मांग की हो या युद्ध विराम की बात कही हो।

इस दस्तावेज में अप्रेल से दिसंबर 2025 के बीच फोन कॉल, ईमेल और बैठकों का विस्तृत विवरण दिया गया है। पहलगाम आतंकी हमले के दो दिन बाद भारतीय दूतावास ने इस फर्म को उच्चस्तरीय दौरों की तैयारियों और समन्वय में सहयोग के लिए नियुक्त किया था।