
Donald Trump (Photo - Bloomberg)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी व्यापारिक नीतियों की सफलता का दावा करते हुए कहा है कि आयात शुल्क (टैरिफ) के माध्यम से अमेरिकी खजाने में अब तक 600 अरब डॉलर से अधिक की राशि जमा हो चुकी है। ट्रंप ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह आंकड़ा और भी बढ़ेगा। उन्होंने अपनी इस नीति का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि टैरिफ ने न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी पहले के मुकाबले अधिक सशक्त बनाया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ' पर जारी एक बयान में राष्ट्रपति ट्रंप अपने देश की मीडिया पर भड़क उठे। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया जानबूझकर उनकी सरकार की इस उपलब्धि को छिपा रहा है। ट्रंप के अनुसार, मीडिया का यह रवैया सुप्रीम कोर्ट के उस संभावित फैसले को प्रभावित करने की एक कोशिश है जो टैरिफ नीति से संबंधित है। उन्होंने मीडिया को 'फेक न्यूज' करार देते हुए कहा कि जो लोग इस मुद्दे पर बात नहीं कर रहे, वे देश के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले को अमेरिका के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक बताया।
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में दोबारा सत्ता संभालने के बाद से ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ को अपनी विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का प्रमुख हिस्सा बना लिया है। इसके तहत दुनिया के कई देशों से आने वाले सामानों पर भारी शुल्क लगाए गए हैं। इसी नीति की जद में भारत भी आया है, जिसके उत्पादों पर अमेरिका ने 50 प्रतिशत तक का भारी दंडात्मक टैरिफ लागू कर दिया है। ट्रंप का मानना है कि इस कदम से न केवल घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका का सम्मान भी बढ़ा है।
दूसरी ओर, अमेरिका के इस कड़े रुख का असर वैश्विक व्यापारिक समीकरणों पर भी दिखने लगा है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब अपनी व्यापारिक निर्भरता को अमेरिका से कम करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। नई दिल्ली ने 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने के अमेरिकी फैसले पर सख्त रुख अपनाया है और अपने निर्यात बाजार को विविध बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। हालांकि, भारत ने इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे अभी भी खुले रखे हैं।
खास बात यह है कि अमेरिका भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। भारत अपने कुल वस्तु निर्यात का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को भेजता है, जिसमें विशेष रूप से परिधान, चमड़ा उत्पाद और अन्य उपभोक्ता वस्तुएं शामिल हैं। वहां रहने वाला बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय इन उत्पादों का प्रमुख खरीदार है। ऐसे में अमेरिका की यह टैरिफ नीति भारतीय निर्यातकों और सरकार दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।
Published on:
06 Jan 2026 12:03 am
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