
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो(फोटो-ANI)
US Sanctions ICC 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर प्रतिबंध लगा दिए। इस फैसले से अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के बीच टकराव बढ़ गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों, सैन्य कर्मियों और राजनीतिक नेताओं के खिलाफ ICC के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करेगा। वहीं, अदालत ने प्रतिबंधों को स्वतंत्र न्यायिक संस्था पर हमला बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है।
अमेरिका ने कुछ गतिविधियों को जारी रखने के लिए 180 दिन की अस्थायी छूट भी दी है। इसका उद्देश्य ICC के सदस्य देशों को अमेरिकी चिंताओं पर बातचीत करने और किसी कूटनीतिक समाधान तक पहुंचने का समय देना है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि बातचीत से समाधान नहीं निकलने पर आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी स्थिति में ICC को अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देंगे। रुबियो के मुताबिक, अमेरिका अदालत के साथ लेनदेन पर रोक लगाएगा, ताकि उसके संसाधनों और काम करने की क्षमता पर असर पड़े। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन ने पहले कूटनीतिक बातचीत के जरिए अपनी चिंताओं का समाधान निकालने की कोशिश की थी, लेकिन ICC और उसके सदस्य देशों की ओर से उनकी नजर में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। रुबियो ने चेतावनी दी कि यदि अदालत ने अपनी कार्रवाई से जुड़ी अमेरिकी चिंताओं का समाधान नहीं किया, तो वॉशिंगटन प्रतिबंधों में और बदलाव कर सकता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली ICC की संपत्तियों और संपत्ति संबंधी हितों को ब्लॉक किया जाएगा। अदालत के साथ लेनदेन करने वाली कंपनियों और संस्थाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कुछ सामान्य लाइसेंस जारी किए हैं, जिनके तहत तय शर्तों के साथ कुछ गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इनमें अदालत के कामकाज को बनाए रखने के लिए 180 दिन की अस्थायी अनुमति के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, सॉफ्टवेयर, पेंशन व्यवस्था और ICC की हिरासत में मौजूद लोगों से जुड़ी कुछ गतिविधियां शामिल हैं। ये छूट सीमित गतिविधियों के लिए हैं। इसलिए इन्हें ICC पर लगाए गए प्रतिबंधों की पूरी वापसी नहीं माना जा सकता।
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज करते हुए कहा कि यह एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था के काम में बाधा डालने की कोशिश है। अदालत ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम युद्ध अपराधों और अन्य गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की वैश्विक कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ICC के मुताबिक, रोम संविधि के तहत स्थापित इस अदालत को 125 सदस्य देशों ने नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराध की जांच और मुकदमा चलाने की जिम्मेदारी सौंपी है। अदालत ने अपने सदस्य देशों से अपील की कि वे उसके कामकाज के लिए जरूरी वित्तीय और परिचालन संसाधन सुनिश्चित करें। ICC की अध्यक्ष टोमोको अकाने ने कहा कि अदालत कानून और उपलब्ध सबूतों के आधार पर स्वतंत्र तथा निष्पक्ष तरीके से अपना काम जारी रखेगी। उन्होंने गंभीर अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अदालत के दायित्व को दोहराया।
Updated on:
09 Oct 2026 09:55 pm
Published on:
09 Oct 2026 09:45 pm
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