
गुब्बारा जासूसी कांड के बाद तनाव पूर्ण माहौल में चीन की यात्रा स्थगित करने वाले अमरीका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन चीन की पहली यात्रा पर पहुंच गए हैं। जो बाइडन प्रशासन की ओर से चीन की यात्रा करने वाले ब्लिंकन शीर्ष अधिकारी हैं। यहां उनकी मुलाकात चीन के विदेश मंत्री चिन गैंग से हुई है। रिश्तों में सुधार की बेहद हल्की उम्मीदों के बीच दोनों विदेश मंत्रियों की मुलाकात से पहले चीन के सहायक विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग ने अहम बयान दिया है। हुआ ने क्लोज-डोर मीटिंग से पहले ट्वीट किया, उम्मीद है कि यह बैठक बाली में दोनों राष्ट्रपतियों के बीच बनी सहमति के अनुसार संबंधों को वापस पटरी पर ला सकेगी। बताया जा रहा है कि अमरीकी विदेश मंत्री ब्लिंकन आज चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात कर सकते हैं।
तनाव के तीन मुख्य कारण
दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियों में लंबे समय से बढ़ते जा रहे तनाव के मुख्य रूप तीन मौजूदा कारण हैं। तनाव के ये मुद्दे हैं ताइवान की स्वायत्ता पर दोनों देशों के परस्पर विपरीत दृष्टिकोण, चीन को उन्नत चिप निर्यात पर अमरीकी प्रतिबंध और यूक्रेन युद्ध में चीन का रूस के साथ खड़ा होना।
बातचीत की तीन प्राथमिकताएं
तनाव के बीच पांच साल बाद किसी अमरीकी विदेश मंत्री की चीन यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के कम से कम तीन परिणाम हो सकते हैं।
1. संवादः दोनों देशों में शीर्ष राजनयिक स्तर पर बातचीत की शुरुआत होना अपने आप में अहम है। ब्लिंकन की यात्रा इसका पहला कदम है। यात्रा से पहले हिंद प्रशांत क्षेत्र के राष्ट्रपति बाइडन के समन्वयक कर्ट कैंपबेल ने कहा कि दोनों देशों के बीच असहमतियां वैश्विक प्राथमिकताओं पर साथ काम करने में बाधक नहीं बनना चाहिए।
2. कारोबार रिशतों में सुधारः बाइडन से पहले ट्रंप प्रशासन ने चीनी सामान पर कई टैक्स लगाए थे, जिन्हें हटाने के बाइडन इच्छुक नहीं थे। ऐसे में बाइडन के पद संभालने के वक्त से ही दोनों मुल्कों के रिश्ते तनावपूर्ण हो चुके थे। बल्कि ट्रंप से एक कदम आगे बढ़ते हुए बाइडन ने चीन को होने वाले अमरीकी कंप्यूटर चिप्स के निर्यात पर पाबंदियां लगा दीं और सहयोगियों देशों को भी ऐसा करने को कहा।
3. टकराव को रोकनाः हाल में विएना बैठक के दौरान अमरीका ने कहा था कि अगर चीन रूस को सैन्य या फिर आर्थिक मदद देता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एक मुद्दा ताइवान खाड़ी और दक्षिण चीन सागर का भी है। चीन इन इलाकों पर अपना दावा करता है, जबकि अमरीका का कहना है कि ये अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते हैं।
अमरीकी कूटनीति
ब्लिंकन की चीन यात्रा अमरीका की पूरी एशिया नीति से जुड़ी है। अमरीका एक साथ इन दिनों इस क्षेत्र की तीन अहम ताकतों के साथ बातचीत कर रहा है। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी 21 जून से अमरीका की राजकीय यात्रा पर हैं। 16 जून को अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलविन जापान और फिलीपीन्स के साथ पहली संयुक्त वार्ता करके लौटे हैं। इस तरह अमरीका तीनों अहम एशियाई देशों के साथ अलग-अलग संबंध स्थापित कर रहा है।
Updated on:
19 Jun 2023 07:13 am
Published on:
18 Jun 2023 11:42 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
