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‘भारत-चीन से आने वाली जेनेरिक दवाओं को रोकना होगा नहीं तो…’, अमेरिकी सांसद ने क्यों कह दी यह बात?

अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने भारत और चीन से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर चिंता जताई है। अमेरिका में 50% जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं। स्कॉट ने कहा कि इस पर निर्भरता अमेरिका के लिए खतरा बन सकती है, और देश को अपनी दवाओं के उत्पादन पर ध्यान देना चाहिए।

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भारत

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Mukul Kumar

Dec 18, 2025

Fake medicines being supplied in MP's government hospitals

Fake medicines being supplied in MP's government hospitals (फाइल फोटो- IANS)

अमेरिका के एक सांसद ने भारत और चीन समेत दूसरे देशों से यूएस में आने वाली जेनेरिक दवाओं पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इन देशों पर दवाओं को लेकर पूरी तरह से निर्भर होना सही नहीं है।

बता दें कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 50 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से पहुंचती हैं। इस पर सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि भारत और चीन से आने वाली जेनेरिक दवाएं पर बढ़ती निर्भरता अमेरिका के लोगों के लिए सही नहीं है, यह आने वाले में समय में खतरा बन सकती है।

दूसरे देशों में बनती हैं जेनेरिक दवाएं

स्कॉट ने आगे कहा कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवाओं और उनके कच्चे रसायनों का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों में बनता है। यह स्थिति न सिर्फ सार्वजनिक स्वास्थ्य बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

दवा कैसे बने हैं, इसके बारे में अमेरिका को जानने का पूरा अधिकार

रिक स्कॉट ने कहा- जो भी अमेरिकी दूसरे देशों में बनी जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है, उसे अपनी दवाओं में छिपे इंग्रीडिएंट्स के बारे में जानने का पूरा हक है।

सीनेटर स्कॉट के अनुसार, अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवाओं में लगभग 80 प्रतिशत एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) विदेशों से आते हैं।

इनमें से कई दवाएं असुरक्षित और गंदी फैक्ट्रियों में तैयार की जाती हैं, जहां निरीक्षण बहुत कम होता है। कुछ मामलों में इन दवाओं से गंभीर स्वास्थ्य नुकसान होता है।

स्कॉट ने कहा- खतरों से भरी हैं ये दवाएं

उन्होंने कहा- ये दवाएं लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा, विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता एक रणनीतिक कमजोरी भी है।

स्कॉट ने आगाह करते हुए कहा कि चीन से इस वक्त विवाद चल रहा है, ऐसे में वह किसी भी समय दवाओं की आपूर्ति रोक सकता है। जिससे बुजुर्गों, सेना के जवानों और आम अमेरिकियों को जरूरी दवाएं नहीं मिल पाएंगी।

निरीक्षण के बावजूद पाई जाती है गड़बड़ी

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही विदेशी फैक्ट्रियों में कुछ अचानक निरीक्षण किए जा रहे हों, लेकिन अमेरिकी एफडीए अमेरिका के बाहर स्थित दवा इकाइयों की तुलना में देश के भीतर कहीं ज्यादा निरीक्षण करता है। कई बार विदेशी कंपनियों को नियमों के उल्लंघन पर भी छूट दे दी जाती है ताकि सप्लाई चेन बाधित न हो।

अमेरिका में घट गया है घरेलू उत्पादन

एक रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि अमेरिका में घरेलू दवाओं का उत्पादन तेजी से घटा है। वर्ष 2024 में अमेरिका ने सिर्फ 37 प्रतिशत दवाएं खुद बनाईं। 2002 में यह आंकड़ा 83 प्रतिशत था।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले 95 प्रतिशत आइबुप्रोफेन, 70 प्रतिशत पैरासिटामोल और 45 प्रतिशत से अधिक पेनिसिलिन चीन से आते हैं।

चीन में बनते हैं एपीआई

रिपोर्ट से यह भी पता चलाता है कि दुनियाभर में एंटीबायोटिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले लगभग 90 प्रतिशत एपीआई चीन में बनते हैं। वहीं, अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली शीर्ष 100 जेनेरिक दवाओं में से 83 प्रतिशत के एपीआई का कोई भी स्रोत अमेरिका में नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि भारतीय कंपनियां भी अपने लगभग 80 प्रतिशत एपीआई के लिए चीन पर निर्भर हैं। रिपोर्ट में 2025 की एक स्टडी का हवाला दिया गया है।

भारत के दवाओं में ज्यादा दुष्प्रभाव

इसमें दावा किया गया है कि भारत में जो जेनेरिक दवाओं बन रही हैं, उनसे से जुड़े गंभीर दुष्प्रभाव अमेरिका में बनी उन्हीं दवाओं की तुलना में 54 प्रतिशत अधिक पाए गए।

इन दुष्प्रभावों से विकलांगता या मौत जैसी स्थिति तक बात पहुंच जाती है। सीनेटर स्कॉट ने कहा कि अमेरिकियों को अपनी दवाओं की सुरक्षा और उपलब्धता को लेकर 'जुआ खेलने' के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दवा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए तत्काल सुधारों की मांग की।