
व्हाइट हाउस की ओर से जारी इस तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ के साथ शनिवार 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियानों की निगरानी करते हुए। (फोटो: IANS/X/@WhiteHouse)
वेनेजुएला में शनिवार (3 जनवरी 2026) को हुए अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन 'एब्सोल्यूट रिजॉल्व' और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पश्चिमी गोलार्ध में जियो-पॉलिटिकल में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक रुख और डॉनरो डॉक्ट्रिन के उद्घोष ने लैटिन अमेरिका के देशों में हड़कंप मचा दिया है।
वेनेजुएला में शनिवार को अमेरिका के असाधारण और साहसी सैन्य ऑपरेशन और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यह तो केवल शुरुआत है। ट्रंप और उनके वरिष्ठ सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि अब पूरे गोलार्ध पर अमेरिका की नजर है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका प्रभुत्व को अब दोबारा कभी चुनौती नहीं दी जाएगी।
शनिवार सुबह एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने 200 साल पुरानी 'मुनरो डॉक्ट्रिन' का जिक्र करते हुए इसे एक नए स्तर पर ले जाने की घोषणा की। ट्रंप ने इसे मजाकिया लेकिन गंभीर लहजे में इस पर अपनी छाप का संकेत देते हुए इस 'डॉनरो डॉक्यूमेंट' करार देते हुए कहा, 'मुनरो डॉक्ट्रिन एक बड़ी बात है, लेकिन हमने इसे बहुत पीछे छोड़ दिया है। अब इस गोलार्ध में कोई भी बाहरी ताकत या तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'
ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए कि वेनेजुएला के बाद अब उनके निशाने पर कोलंबिया, क्यूबा और मैक्सिको हैं। उन्होंने कोलंबियाई राष्ट्रपति पर 'कोकीन बनाने' का आरोप दोहराया और मैक्सिको को चेतावनी दी कि उन्हें ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ अमरीकी सेना की 'मदद' लेनी ही होगी।
अमरीकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला ऑपरेशन को अब तक का सबसे कुशल छापा बताया। मादुरो की गिरफ्तारी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, 'मादुरो के पास खुद से हटने का मौका था। उन्होंने ट्रंप की चेतावनी को हल्के में लिया। उन्होंने पंगा लिया और अंजाम भुगत लिया यह उन सभी के लिए सबक है जो अमेरिका संप्रभुता को चुनौती देते हैं।
अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीधे तौर पर हवाना (क्यूबा) को चेतावनी दी है। रुबियो ने कहा कि मादुरो की सुरक्षा और खुफिया तंत्र पूरी तरह से क्यूबाई एजेंटों से भरा हुआ था, जो अब बेअसर हो चुके हैं। 'देखिए, अगर मैं हवाना में रहता और सरकार में होता, तो मैं निश्चित रूप से कम से कम थोड़ा चिंतित होता। क्यूबा एक विफल राष्ट्र है और वहां के शासक अक्षम हैं। अब हम क्यूबा के बारे में बात करेंगे।'
अमेरिकी कार्रवाई पर दक्षिण अमेरिकी देशों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
लगभग एक साल पहले अपने शपथ भाषण (जनवरी 2025) में ही ट्रंप ने 'अमेरिका फर्स्ट' विदेश नीति का विस्तारवादी रूप पेश किया था। उन्होंने तब स्पष्ट किया था कि वे पारंपरिक अलगाववाद से हटकर अमेरिकी हितों के लिए सैन्य शक्ति के उपयोग से पीछे नहीं हटेंगे। वेनेजुएला का तख्तापलट उनके उसी 'शक्ति के माध्यम से शांति' के वादे की एक कड़ी है।
ट्रंप प्रशासन की विस्तारवादी नीति केवल लैटिन अमरीका तक सीमित नहीं है। पूर्व प्रशासन अधिकारी केटी मिलर ने हाल ही में अमरीकी झंडे के साथ ग्रीनलैंड का नक्शा साझा किया और कैप्शन दिया: जल्द आ रहे हैं। ट्रंप पहले भी कनाडा को '51वां राज्य' बनाने और डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने जैसे विवादास्पद वक्तव्य दे चुके हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी की इस कार्रवाई से वैश्विक संतुलन बिगड़ सकता है। चिली के पूर्व राजदूत जॉर्ज हेन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका वेनेजुएला में संप्रभुता का उल्लंघन कर सकता है, तो बीजिंग इसका फायदा उठा सकता है। उन्होंने कहा, 'बीजिंग तर्क दे सकता है कि अगर अमेरिका वेनेजुएला पर दावा कर सकता है, तो ताइवान पर चीन का दावा कहीं अधिक मजबूत है।'
वेनेजुएला में मादुरो का पतन केवल एक देश की सत्ता का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह ट्रंप के नेतृत्व में एक नए अमेरिकी आधिपत्य का उदय है। जहां एक तरफ ट्रंप के मागा समर्थक इस कार्रवाई का जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया एक नए 'शीत युद्ध' या उससे भी बड़े संघर्ष की आशंका से कांप रही है।
Published on:
05 Jan 2026 05:50 am
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
