
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। (सोर्स: तुर्कीए एक्स)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी चीन जाने की तैयारी में हैं। जानकारी के मुताबिक, वह 19 मई को दो दिन के लिए चीन के लिए रवाना होंगे।
इस यात्रा में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की कोशिश होगी। माना जा रहा है कि ईरान-अमेरिका के बीच तनाव का मामला और गंभीर हो गया है। यह भी पुतिन की यात्रा का एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
ट्रंप शुक्रवार 15 मई को अपने चीन दौरे से लौटे थे। भव्य स्वागत के बावजूद व्यापार, ताइवान और यूक्रेन जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तनाव साफ दिखा। ठीक अगले दिन रूस ने पुतिन की यात्रा की घोषणा कर दी। यह समय संयोग नहीं लगता।
रूसी सरकार के बयान में कहा गया है कि पुतिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी खुलकर बात करेंगे और आखिर में एक संयुक्त घोषणा पत्र पर दस्तखत होंगे।
पुतिन चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात करेंगे। इसमें आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने पर खास ध्यान रहेगा।
याद रहे कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। चीन रूसी तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
यूक्रेन-रूस संघर्ष इस यात्रा का अहम मुद्दा रहेगा। चीन हमेशा से बातचीत का रास्ता अपनाने की बात करता रहा है, लेकिन उसने रूस की कार्रवाई की कभी निंदा नहीं की। बीजिंग खुद को तटस्थ बताता है और कहता है कि पश्चिमी देश हथियार देकर युद्ध को लंबा खींच रहे हैं।
चीन रूस को हथियार देने के आरोप से भी इनकार करता है। लेकिन हकीकत यह है कि रूस की अर्थव्यवस्था चीन पर काफी हद तक निर्भर हो गई है। दोनों देश मिलकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के दबाव का मुकाबला करने की रणनीति बना रहे हैं।
यह यात्रा सिर्फ दो देशों के बीच नहीं है। यह दिखाती है कि रूस-चीन का ब्लॉक मजबूत हो रहा है। ट्रंप प्रशासन व्यापार युद्ध और सुरक्षा मुद्दों पर चीन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बीजिंग मॉस्को के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और सैन्य सहयोग जैसे क्षेत्रों में नए समझौते हो सकते हैं। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर भी एक-दूसरे का साथ देते दिख रहे हैं।
Updated on:
16 May 2026 03:30 pm
Published on:
16 May 2026 03:30 pm
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