
ट्रंप को चुनौती देने वाली स्मिता घोष (फोटो- सोशल मीडिया)
Birthright Citizenship Law: अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता से जुड़े कानून की रक्षा में भारतवंशी वकील स्मिता घोष अहम चेहरा बनकर उभरी हैं। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस कानून को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। स्मिता उन वकीलों में से हैं जो नागरिकता कानून के पक्ष में लड़ाई लड़ रही हैं। आइए, उनके बारे में जानते हैं।
स्मिता घोष भारतीय मूल की संवैधानिक कानून और अमेरिकी कानूनी इतिहास की विशेषज्ञ हैं। उन्होंने स्वार्थमोर कॉलेज से इतिहास में हाई ऑनर्स के साथ ग्रेजुएशन किया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया कैरी लॉ स्कूल से कानून की डिग्री हासिल की। उन्होंने लीगल हिस्ट्री में पीएचडी भी की। उनके साथी उन्हें इतिहास की वकील कहकर बुलाते हैं।
स्मिता की निजी जिंदगी के बारे में बेहद कम जानकारी उपलब्ध है। करियर की शुरुआत में उन्होंने विक्टर बोल्डन के लिए क्लर्क के रूप में काम किया। वह कोर्ट के फैसलों का ड्राफ्ट तैयार करती थीं और ट्रायल से जुड़ी तैयारियों में भाग लेती थीं। अब वह कॉन्स्टिट्यूशनल एकाउंटेबिलिटी सेंटर में सीनियर अपीलेट काउंसिल हैं। वह जटिल संवैधानिक मामलों पर काम करती हैं। इस संस्था ने ट्रंप प्रशासन की नीति के खिलाफ कानूनी चुनौती देने में अहम भूमिका निभाई है।
जन्मजात नागरिकता के केस में स्मिता की दलीली को फाउंडिंग आर्ग्युमेंट कहा जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिकी कानून के मुताबिक, अगर कोई बच्चा लावारिस मिलता है तो वह अमेरिकी नागरिक माना जाता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे बच्चे को नागरिकता दे सकते हैं तो फिर उस बच्चे को नागरिकता देना कैसे गलत हो सकता है जिसका जन्म अमेरिका में हुआ है।
स्मिता ने निजी वकालत और नागरिक अधिकार के क्षेत्र में भी काम किया है। घोष उन भारतीय-अमेरिकी वकीलों के समूह का हिस्सा हैं जो नागरिकता और इमिग्रेशन के मुद्दे को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं। यह दिखाता है कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की भूमिका अब इमिग्रेशन कानून जैसे बड़े मुद्दों पर भी अहम हो गई है।
Updated on:
03 Apr 2026 07:16 am
Published on:
03 Apr 2026 07:15 am
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