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कौन है जिंदा शहीद? जो बन सकता है हमास का अलगा चीफ, नेतन्याहू को मजबूरन बचानी पड़ी थी उसकी जान

याह्या सिनवार के बाद हमास के अगले चीफ के चुनाव को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। इस लिस्ट में खालिद मशाल का नाम सबसे आगे चल रहा है। पढ़ें पूरी खबर...

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खालिद मशाल, हमास नेता (फोटो- X israelnewspulse)

इजरायल और हमास के बीच सीचफायर होने के बाद गाजा में एक बार फिर मिलिशिया संगठन खुद को मजबूत करने में जुटा है। हमास आंतरिक चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है। हमास के एक नेता ने मीडिया से कहा कि चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। हालात सही होते ही चुनाव कराए जाएंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमास के अगले चीफ को लेकर खालिद मशाल का नाम सबसे आगे चल रहा है। कभी खालिद मशाल को मौत के घाट उतारने के लिए इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने जहर का इस्तेमाल किया था, लेकिन जॉर्डन ने मोसाद की इस हरकत पर कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके बाद मोसाद को खालिद को मजबूरी में बचाना पड़ा।

इस्माइल हानिया और याह्या सिनवार की मौत

अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद इजरायल ने जंग का ऐलान कर दिया था। तब से अब तक हमास के दो प्रमुख मारे जा चुके हैं। इजरायल ने जुलाई 2024 में तेहरान में इस्माइल हानिया की हत्या कर दी थी। इसके बाद अगस्त में याह्या सिनवार को हमास का प्रमुख बनाया गया। दो महीने बाद अक्टूबर में सिनवार को गाजा के राफा शहर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। सिनवार के मारे जाने के बाद हमास में किसी को भी चीफ नहीं बनाया गया।

जंग के दौरान यह भी माना गया कि अगर कोई नया चीफ बनाया जाता है तो इजराइली सेना उसे निशाना बना सकती है। लिहाजा, हमास ने कतर में स्थित पांच सदस्यों वाली एक अंतरिम लीडरशिप कमेटी बनाई, ताकि किसी एक शख्स को इजरायल निशाना न बनाए। बीते 15 महीने से यही कमिटी हमास से जुड़े फैसले ले रही है।

खालिद मशाल कौन है?

हमास चीफ के लिए खालिद मशाल का नाम सबसे आगे चल रहा है। खालिद का जन्म 1956 में वेस्ट बैंक में हुआ था। 1987 में हमास का गठन होने के बाद वह उसमें शामिल हो गया। हमास में रहते हुए वह कुवैत, जॉर्डन, सीरिया व कतर में भी रहा। इसके साथ ही वह 1996 में हमास का पॉलिटिकल चीफ बना था और 2017 में इस पद पर रहा। इसके बाद इस्माइल हानिया ने उसकी जगह ली थी। खालिद अभी कतर में रह रहा है।

कहा जाता है कि दुनिया भर में हमास और गाजा के प्रति समर्थन जुटाने में खालिद मशाल का बड़ा योगदान है। वह कूटनीति का माहिर खिलाड़ी है। हमास के कई बड़े नेताओं पर यात्रा से जुड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं, मगर विदेश में रहने की वजह से मशाल को कम प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।

इजराइल ने पहले दिया जहर, फिर बचाया

खालिद मशाल 1997 में जॉर्डन में ठहरा हुआ था। इस दौरान उसे जहर दे दिया गया। मोसाद के एजेंटों ने उसे जहर दी थी, लेकिन जॉर्डन के सुरक्षा अधिकारियों ने एजेंट को पकड़ लिया। इसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि अगर खालिद को जल्द से जल्द एंटिडोट नहीं दिया गया तो उसकी मौत निश्चित है। इसके बाद जॉर्डन किंग हुसैन ने इजराइल को धमकी दी कि अगर आधी रात से पहले उस जहर का एंटीडोट नहीं भेजा गया तो वह इजराइल के साथ हुआ शांति समझौता तोड़ देंगे। इतना ही नहीं, जहर देने वाले मोसाद के एजेंट्स को फांसी पर लटका देंगे। इसके बाद इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने बातचीत की, फिर इजरायल को एंटिडोट भिजवाना पड़ा।