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क्या कोहिनूर हीरा भारत को वापस मिलेगा? UK की मंत्री नंदी ने दिया ये जवाब

Kohinoor Diamond: ब्रिटेन की संस्कृति, मीडिया एवं खेल मंत्री लिसा नंदी ने शुक्रवार को नयी दिल्ली में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ एक प्रमुख नए सांस्कृतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए।

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भारत

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Devika Chatraj

May 05, 2025

ब्रिटेन की संस्कृति, मीडिया और खेल मंत्री लिसा नंदी ने कहा है कि कोहिनूर को भारत के साथ साझा किया जा सकता है। उनका देश भारत के साथ सांस्कृतिक धरोहरों की साझी पहुंच पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने यह बयान कोहिनूर को लौटने संबंधी भारत की मांग के बारे में किए गए एक सवाल के जबाव में किया। नंदी ने बताया कि इस विषय पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से संवाद जारी है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों तक दोनों देशों के लोगों की पहुंच को आसान बनाना है। लिसा नंदी इन दिनों भारत यात्रा पर आई हुई हैं।

भारत और ब्रिटेन के संबंधो पर चर्चा

इस दौरान उन्होंने भारत और ब्रिटेन के गहरे संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि फिल्म, संगीत, फैशन और गेमिंग जैसे क्षेत्रों में दोनों देश वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली काम कर रहे हैं। इन क्षेत्रों को दोनों देश मिलकर नए आयाम दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रदर्शनी, संग्रहों की यात्रा और सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के लोगों को सांस्कृतिक धरोहरों का लाभ पहुंचाया जाएगा।

सांस्कृतिक सहयोग पर हस्ताक्षर

नंदी ने नई दिल्ली में पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ एक नए सांस्कृतिक सहयोग एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य कला और विरासत के माध्यम से भारत और ब्रिटेन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और दोनों देशों के सांस्कृतिक संस्थानों व रचनात्मक व्यवसायों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को प्रोत्साहित करना है।

क्या है कोहिनूर का किस्सा

कोहिनूर हीरा करीब 800 साल पहले आंध्रप्रदेश की गोलकुंडा की खदान से निकाला गया था। यह उस समय दुनिया का सबसे बड़ा हीरा था और इसका वजन 186 कैरेट था। इसके बाद से इस हीरे को कई बार तराशा गया और इसका मूल रूप 105.6 कैरेट का है। भारत में शासन के दौरान अंग्रेज इसे ब्रिटेन ले गए। यह ब्रिटिश राजपरिवार की शाही गहनों का हिस्सा बना और 1937 में महारानी एलिजाबेथ ने इसे मुकुट में धारण किया। भारत इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानता है और इसे लौटाने की मांग करता रहा है।

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