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Azim Premji : 21 साल की उम्र में संभाली कंपनी, जानिए अजीम प्रेमजी के वे फैसले, जिनसे बदली भारतीय आईटी की तस्वीर

Azim Premji Birthday: 24 जुलाई को अजीम प्रेमजी का जन्मदिन है। 21 साल की उम्र में उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी मिली, जहां से उनकी पूरी जिंदगी बदल गई। आइए जानते हैं, उनकी दूरदर्शिता, नेतृत्व क्षमता, सादगी और परोपकार की कहानी।
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भारत

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Adarsh Thakur

Jul 24, 2026

Azim Premji Birthday

Azim Premji Story: अजीम प्रेमजी के संघर्ष की कहानी। (Image: AI)

Azim Premji Success Story: 24 जुलाई को भारतीय उद्योग जगत के उस नाम का जन्मदिन है, जिसने भारतीय आईटी सेक्टर की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। यह नाम है अजीम प्रेमजी का। उन्हें अक्सर विप्रो के संस्थापक के रूप में याद किया जाता है, लेकिन उनकी असली पहचान एक ऐसे उद्योगपति की है, जिसने कारोबार के साथ ईमानदारी, सादगी और समाज के प्रति जिम्मेदारी को भी बराबर महत्व दिया। आज के लेख में जानते हैं, अजीम प्रेमजी के संघर्ष और सफलता के सफर के बारे में।

21 की उम्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी

अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई में हुआ। विप्रो की स्थापना भी इसी साल 29 दिसंबर 1945 को हुई थी। इसकी शुरुआत उनके पिता मोहम्मद हाशिम प्रेमजी ने महाराष्ट्र के अमलनेर में 'वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड' के रूप में की थी। शुरुआत में यह कंपनी कुकिंग ऑयल और वनस्पति घी बनाने का काम करती थी।

1966 में जब अजीम प्रेमजी अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तभी उनके पिता का अचानक निधन हो गया। महज 21 साल की उम्र में उन्हें पढ़ाई छोड़कर भारत लौटना पड़ा और परिवार की कंपनी की कमान संभालनी पड़ी। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही युवा आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक खड़ी करेगा।

वनस्पति तेल से आईटी कंपनी बनने तक का सफर

जब अजीम प्रेमजी ने कंपनी संभाली, तब उसमें केवल खाद्य तेल का कारोबार होता था। इसके बाद उन्होंने समय की जरूरत को समझा। 1970 के दशक में कंपनी ने नए क्षेत्रों में कदम बढ़ाना शुरू किया और 1977 में इसका नाम बदलकर विप्रो कर दिया गया। बाद में 1980 के दशक में उन्होंने कंप्यूटर हार्डवेयर और फिर सॉफ्टवेयर सेवाओं के क्षेत्र में काम करने का फैसला लिया।

उस समय भारत में आईटी उद्योग शुरुआती दौर में था। मुश्किलें बहुत थीं, लेकिन प्रेमजी ने भविष्य की संभावनाओं को पहचाना। विप्रो ने कंप्यूटर निर्माण, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और बाद में वैश्विक आईटी सेवाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई। आज कंपनी दर्जनों देशों में कारोबार करती है और भारतीय आईटी उद्योग की प्रमुख कंपनियों में गिनी जाती है। उन्होंने ऐसे समय में तकनीक पर काम करना शुरू किया, जब ज्यादातर भारतीय कंपनियां पारंपरिक कारोबार तक सीमित थीं।

वे बड़े फैसले, जिन्होंने बदली विप्रो की दिशा

  1. समय रहते आईटी सेक्टर में प्रवेश

अजीम प्रेमजी खाद्य उत्पादों के कारोबार तक सीमित नहीं रहना चाहते थे। यदि ऐसा होता, तो शायद विप्रो आज वैश्विक तकनीकी कंपनी (Global technology company) नहीं बन पाती। ऐसे में उन्होंने आईटी को भविष्य मानकर उसी दिशा में निवेश किया।

  1. गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं

विप्रो ने शुरुआती दौर से ही अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर काम किया। इसी वजह से विदेशी कंपनियों का भरोसा मिला और कंपनी को वैश्विक बाजार में जगह मिली।

  1. नैतिक कारोबार को प्राथमिकता

अजीम प्रेमजी हमेशा कहते हैं कि ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के बिना कोई भी व्यवसाय लंबे समय तक सफल नहीं हो सकता। उनके नेतृत्व में कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता को विशेष महत्व मिला।

  1. कर्मचारियों को सबसे बड़ी ताकत माना

उन्होंने कर्मचारियों के प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास और लंबे समय तक संगठन से जुड़ाव पर जोर दिया। यही वजह रही कि विप्रो ने मजबूत नेतृत्व तैयार किया।

  1. समाज को लौटाने का फैसला

अजीम प्रेमजी ने कंपनी को आगे ले जाने के साथ ही अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाज के लिए समर्पित किया। इसी फैसले ने उन्हें दुनिया के सबसे सम्मानित उद्योगपतियों में शामिल किया।

दुनिया के बड़े दानदाताओं में गिने जाते हैं अजीम प्रेमजी

अजीम प्रेमजी का नाम दुनिया के प्रमुख समाज के लिए दान देने वाले उद्योगपतियों में लिया जाता है। उनके द्वारा 2001 में स्थापित "अजीम प्रेमजी फाउंडेशन" सरकारी स्कूलों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में काम कर रहा है। फाउंडेशन का काम कई राज्यों में सीधे और देशभर में सहयोगी संस्थाओं के जरिए चलता है।

हाल के वर्षों में फाउंडेशन ने सरकारी स्कूलों से पढ़ने वाली लाखों छात्राओं की उच्च शिक्षा के लिए हजारों करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की। इसे भारत की सबसे बड़ी निजी गैर लाभकारी छात्रवृत्ति पहलों में से एक माना गया।

सादगी सबसे बड़ी पहचान

अरबों रुपये की संपत्ति होने के बावजूद अजीम प्रेमजी सादगी-भरा जीवन जीते हैं। वे फिजूल खर्च से बचने, अनुशासन और समय की पाबंदी पर खास ध्यान देते हैं। उनके सहयोगियों के अनुसार, वे निर्णय लेते समय हमेशा यह सोचते हैं कि कंपनी, कर्मचारी और समाज तीनों का भला कैसे हो।

भारतीय आईटी उद्योग में उनकी भूमिका

जब भारत में आईटी उद्योग शुरुआती दौर में था, तब कुछ कंपनियों ने मिलकर इस उद्योग की मजबूत नींव रखी। इनमें टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो प्रमुख रहीं। विप्रो ने भारतीय इंजीनियरों की प्रतिभा को दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इससे भारत वैश्विक आईटी सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन सका।

युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए 5 सीख

  • जल्दी सफलता नहीं, लंबी सफलता का लक्ष्य रखें।
  • ईमानदारी किसी भी बिजनेस की सबसे बड़ी पूंजी है।
  • बदलती तकनीक को समय रहते अपनाना जरूरी है।
  • कर्मचारियों को केवल संसाधन नहीं, साझेदार समझें।
  • कमाई के साथ समाज को लौटाने की जिम्मेदारी भी निभाएं।

नेतृत्व अगली पीढ़ी को सौंपा

2019 में अजीम प्रेमजी ने करीब 53 साल तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद कार्यकारी चेयरमैन का पद छोड़ दिया। उनके बेटे रिशाद प्रेमजी ने यह जिम्मेदारी संभाली, जबकि अजीम प्रेमजी संस्थापक चेयरमैन के रूप में जुड़े रहे।