
डायबिटीज से बढ़ सकता है हार्ट अटैक, स्ट्रोक, नर्व डैमेज, और अंधेपन का खतरा- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Diabetes Side Effects: आजकल हमारे देश में डायबिटीज (शुगर) की बीमारी इतनी तेजी से फैल रही है कि हर दूसरे-तीसरे घर में इसका एक मरीज मिल ही जाता है। अगर आप भी डायबिटीज को इतनी हल्की बीमारी समझते हैं, तो अब संभल जाने का वक्त आ गया है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) की रिपोर्ट के मुताबिक, डायबिटीज धीरे-धीरे शरीर के अंदर हमारे दिल, दिमाग, आंखों और नसों को भी नुकसान पहुंचाती है। आइए जानते हैं कि शुगर का बढ़ा हुआ लेवल हमारे शरीर के किन-किन हिस्सों पर हमला करता है।
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज का कहना है कि जिन लोगों को डायबिटीज होती है, उनमें आम लोगों के मुकाबले हार्ट अटैक (दिल का दौरा) और स्ट्रोक (दिमाग का दौरा) पड़ने का खतरा ज्यादा होता है। जब खून में शुगर लगातार ज्यादा बनी रहती है, तो यह हमारी खून की नलियों (Blood Vessels) की अंदरूनी दीवार को नुकसान पहुंचाती है। इससे नलियां सख्त और संकरी हो जाती हैं। इसके कारण दिल तक खून सही से नहीं पहुंच पाता और अचानक हार्ट अटैक आ जाता है। ठीक इसी तरह जब दिमाग की नसों में खून का बहाव रुकता है, तो स्ट्रोक हो जाता है।
क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि शुगर के मरीजों को अक्सर पैरों या हाथों में अजीब सी झुनझुनी होती है? कभी-कभी हाथ-पैर सुन्न पड़ जाते हैं या ऐसा लगता है जैसे कोई सुई चुभो रहा हो। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। हाई शुगर लेवल नसों तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने वाली छोटी-छोटी नलियों को मार देता है। जब नसें कमजोर हो जाती हैं, तो पैरों में कोई चोट या कट लगने पर दर्द महसूस ही नहीं होता। दर्द महसूस न होने की वजह से लोग घाव पर ध्यान नहीं देते और वह बड़ा इंफेक्शन बन जाता है।
डायबिटीज चुपके से इंसान की आंखों की रोशनी भी छीन सकती है। जब शरीर में शुगर का लेवल लंबे समय तक अनकंट्रोल रहता है, तो यह हमारी आंख के पीछे मौजूद पर्दे (रेटिना) की बेहद नाजुक नसों को फाड़ या डैमेज कर देती है। इसे 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' कहा जाता है। शुरुआत में तो मरीज को सब ठीक दिखता है, लेकिन धीरे-धीरे आंखों के आगे धुंधलापन आने लगता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न कराया जाए, तो इंसान हमेशा-हमेशा के लिए अंधा हो सकता है।
हमारे गुर्दे शरीर के लिए छलनी का काम करते हैं, जो खून की सारी गंदगी और जहरीले तत्वों को छानकर पेशाब के जरिए बाहर निकालते हैं। लेकिन खून में जरूरत से ज्यादा शुगर रहने पर किडनी की ये बारीक छलनियां खराब होने लगती हैं। जब किडनी सही से काम नहीं कर पाती, तो शरीर में जहरीला पानी और गंदगी जमा होने लगती है। अगर बात बहुत बिगड़ जाए, तो मरीज को डायलिसिस कराना पड़ता है या फिर किडनी बदलवानी पड़ जाती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
23 Jul 2026 01:00 pm
