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मिस्र के राष्ट्रपति का बयान- मस्जिद पर हुए हमले का दिया जाएगा माकूल जवाब

विस्फोट में 235 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को नमाज अता के दौरान लोग रॉवडा मस्जिद के बाहर इक्टठा हुए थे।

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Egyptian President said The response to the mosque will be answered

सिनाई: शुक्रवार को सिनाई में हुए हमले के बाद मिश्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल—सीसी ने आतंकवाद को मिटाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इस आतंकी हमला का बदला लिया जाएगा। जिसके लिए मिश्र के लोग पहले अधिक मजबूत होकर आतंकवाद का मुकाबला करेंगे। मिस्र के अशांत उत्तरी सिनाई में एक मस्जिद में बड़ा धमाका किया गया है। विस्फोट में 235 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को नमाज अता के दौरान लोग रॉवडा मस्जिद के बाहर इक्टठा हुए थे। इसी दौरान बड़ा विस्फोट हुआ। धमाके में 145 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। अलआरिश में अल रॉवडा मस्जिद के पास बम फीट किया गया था । बताया जा रहा है कि हमले के बाद हमलावरों ने लोगों पर फायरिंग भी की। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता खालिद मेगाहेद ने बताया कि यहां बड़ा हमला किया गया है। सरकारी न्यूज ऐजेंसी के मुताबिक विस्फोट में 115 लोगों की मौत हो गई। वैसे किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

हमलावरों ने की फायरिंग

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अलआरिश के पास स्थित रावडा की एक मस्जिद में विस्फोट किया गया है। विस्फोट के बाद हमलावरों ने वहां गोलियां बरसानी शुरू कर दी।

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अक्टूबर में चर्च पर हुआ था हमला

गौरतलब है कि मिस्र के सिनाई में अक्टूबर में चर्च पर हुए हमले में 40 लोगों की मौत हुई थी। आईएसआई ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसके साथ ही आतंकियों ने बैंक को भी लूटा था।सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अल-अरिश के केंद्र में स्थित सेंट जॉर्ज चर्च के बाहर ग्रेनेड से हमला किया।

मिस्त्र में बढ़े आतंकी हमले

गौरतलब है कि इसी साल आईएस के आतंकियों ने यहां के चर्च पर हमले किए थे। जिसमें 40 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 110 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। मिस्र के उत्तरी सिनाई में जनवरी, 2011 से ही कई हिंसक हमले हुए हैं। लगातार हो रहे हमले के चलते राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को इस्ताफा देना पड़ा था। इसी साल अप्रैल महीने में मिस्र के राष्ट्रपति ने हो रहे हमले को देखते हुए देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। साथ ही विशेष सैन्य बलों को आदेश दिए थे कि वे देश के अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करें।