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ABVP सबसे निराला छात्र संगठन क्यों, ये Video देखिए तो समझ आएगा

-अन्य छात्र संगठन आजादी मांगते हैं तो एबीवीपी के सदस्य ‘छात्र शक्ति-राष्ट्र शक्ति’ की गूंज करते हैं -विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं में अधिकार नहीं, दायित्व की भावना होती

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Sunil ambekar

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारी के लिए आए सुनील आंबेकर का स्वागत।

आगरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी। वाकई सबसे अलग छात्र संगठन है। यूं कहें कि सबसे निराला छात्र संगठन है तो अतिश्योक्ति नहीं है। एबीवीपी के सदस्यों को सिखाई जा रही है देशभक्ति। इसका प्रकटीकरण होता है नारों से। अन्य छात्र संगठन आजादी मांगते हैं तो एबीवीपी के सदस्य ‘छात्र शक्ति-राष्ट्र शक्ति’ की गूंज करते हैं।

स्टूडेंट पॉवर- नेशन पॉवर

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेडकर आगरा आए तो उनके स्वागत में ऐसे नारे लगे कि सब हैरत में पड़ गए। यहां जिन्दाबाद या मुर्दाबाद नहीं होता है। गूंज होती है तो भारत माता की जय, सबकी माता की जय, वंदे मातरम, असम हो या गोहाटी अपना देश अपनी माटी, जय जय जय जय जय भारत माता की जय, स्वागत है भई स्वागत है आगरा में स्वागत है, आगरा हो या गोहाटी अपना देश अपनी माटी, स्टूडेंट पॉवर- नेशन पॉवर।

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नारों की गूंज

असल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आगरा कॉलेज मैदान पर राष्ट्रीय अधिवेशन 22 से 25 नवम्बर तक होने जा रहा है। अधिवेशन के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों का आगमन शुरू हो गया है। इसी के तहत संगठन मंत्री सुनील आंबेकर के साथ राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री केएन रघुनंदन, श्रीनिवास, प्रफुल्ल अकान्त, क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनोज नीखरा भी आए। इन्हें देखते ही कार्यकर्ता जोश से भर गए। इतने जोश से नारे लगाए कि आगरा कॉलेज मैदान गुंजा दिया। महात्मा गांधी रोड तक आवाज जा रही थी।

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जमीन पर बैठे

कार्यालय के उद्घाटन के समय सिर्फ चार अतिथियों को कुर्सी पर बैठाया गया। सामने कुछ कुर्सियां संगठन मंत्रियों के लिए थीं। अन्य सभी कार्यकर्ता जमीन पर ही बैठ गए। कहीं कोई शोर नहीं, कहीं कुर्सी की लड़ाई नहीं। मीडिया प्रभारी धीरज शर्मा ने बताया अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं में अधिकार नहीं, दायित्व की भावना होती है। यहां भारत सर्वोपरि है। जब छात्र जीवन में देशभक्ति की भावना जाग्रत हो जाएगी, तो व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में रहे, वह पहले देश के लिए काम करेगा। एबीवीपी से निकले कार्यकर्ताओं ने राजनीति में भी शुचिता के मानदंड स्थापित किए हैं।

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