दिल दहला रहा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, 853 हादसों में मौतों की संख्या चौंका देगी

सात लाख वाहन प्रतिमाह दौड़ते हैं पर गति नियंत्रित करने की व्यवस्था नहीं, अभी तक नहीं लगे हैं कैमरे

By: Bhanu Pratap

Published: 16 May 2018, 06:23 PM IST

आगरा। 23 दिसम्बर 2016 को आगरा को प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जोड़ने वाला 302 किलोमीटर लम्बा एक्सप्रेसवे शुरू हुआ। इस पर 19 जनवरी, 2018 की मध्यरात्रि से टोल लगना प्रारंभ हो गया। इसके बाद भी अभी तक इस एक्सप्रेसवे पर बेतहाशा तेज गति से दौड़ने वाले वाहनों को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई है। इसका परिणाम यह है कि अगस्त-2017 से मार्च-2018 तक 853 हादसों में 100 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। सूचना अधिकार में यह खुलासा आगरा डवलपमेन्ट फाउण्डेशन (एडीएफ) के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन को अभी हाल में उपलब्ध कराई गई सूचना से हुआ। आश्चर्यजनक रूप से एक्सप्रेसवे पर पार्किंग व पेट्रोल पम्प की सुविधा भी अभी तक प्रारंभ नहीं हुई है। इसे जून, 2018 के अंत तक शुरू करने की बात कही जा रही है।

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सात लाख वाहनों से 14 करोड़ रुपये मिले

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इन्डस्ट्रियल डेवलपमेन्ट अथॉरिटी (यूपीडा) ने उपलब्ध कराई सूचना में बताया कि हल्के वाहनों हेतु एक्सप्रेसवे पर गतिसीमा 100 किमी प्रति घंटा व भारी वाहनों हेतु गतिसीमा 80 किमी प्रति घंटा है। इस पर गति उल्लंघन को रोकने एवं ट्रैफिक की सुरक्षा के लिए ‘एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेन्ट सिस्टम’ के अंतर्गत 10 कैमरे लगाये जाने हैं, जिनके लिए निविदा प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है। उपलब्ध कराये गये आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-2018 में 7 लाख से ज्यादा वाहन एक्सप्रेसवे से गुजरे, जिनसे 14 करोड़ से अधिक की राशि टोल टैक्स के रूप में प्राप्त हुई। वर्ष 2018 में माहवार टोल की राशि और वाहनों की संख्या इस प्रकार बताई गईः-

माह टोल की धनराशि गुजरे वाहनों की संख्या

जनवरी, 2018 रुपये, 3,46,59,007, 1,63,756

फरवरी, 2018 रुपये, 11,28,75,863, 6,26,153

मार्च, 2018 रुपये, 12,40,72,071, 6,82,357

अप्रैल, 2018 रुपये, 14,09,22,438, 7,15,110

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ट्रॉमा सेन्टर विचाराधीन

अगस्त-2017 से मार्च-2018 के बीच इस एक्सप्रेसवे पर हर तीन दिन में औसत एक व्यक्ति कालग्रसित हुआ। आवागमन को सुगम कहा जाने वाला यह एक्सप्रेसवे इतना खतरनाक है, शायद ही लोगों को इसका अंदाजा है।यह पूछे जाने पर कि एक्सप्रेसवे पर कौन-कौन सी सुविधायें हैं और कौन-कौन सी सुविधायें कब तक प्रदान की जायेंगी, यूपीडा ने बताया कि पेयजल और शौचालय की सुविधा 04 वे-साइड एमेनिटीज़ स्थल के रूप में प्रारंभ की जा चुकी हैं। खानपान का संचालन अप्रैल-2018 तक प्रारंभ किया जाना लक्षित था। पार्किंग, विश्राम हेतु कक्षों एवं डोरमेटरी तथा पेट्रोल पम्प का संचालन जून-2018 तक प्रारंभ किया जाना है। यूपीडा द्वारा यह भी बताया गया कि वे-साइड एमेनिटीज़ एरिया में 10-10 बैड के ट्रॉमा सेन्टर विचाराधीन हैं।

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टोल वसूले जाने पर सवाल

अधिवक्ता के0सी0 जैन द्वारा पार्किंग, पेट्रोल पम्प, ट्राॅमा सेन्टर व गतिनियंत्रण हेतु कैमरों को लगाये बिना करोड़ों रुपया प्रतिमाह टोल के रूप में वसूले जाने के औचित्य पर प्रश्न उठाया। सच यह है कि गतिनियंत्रण व सुविधाओं के अभाव में हादसे हो रहे हैं जबकि एक्सप्रेसवे का उद्देश्य वाहनों का तेज गति से चलना नहीं, अपितु सुरक्षित यातायात है और आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण विगत 9 माहों में 853 हादसों में 100 व्यक्तियों ने अपनी जान गंवा दी। ट्रॉमा सेन्टर व चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी ने भी इस एक्सप्रेसवे को असुरक्षित बना रखा है।

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हर दिशा में पांच स्थानों पर हों सुविधाएं

एडीएफ की ओर से यह भी प्रश्न उठाया गया है कि 302 किमी लम्बे एक्सप्रेसवे पर प्रत्येक दिशा में केवल दो-दो स्थानों पर वे-साइड एमेनिटीज़ होना कम है, जबकि 165 किमी लम्बे यमुना एक्सप्रेसवे पर प्रत्येक दिशा में तीन-तीन स्थानों पर ऐसी सुविधायें हैं। लखनऊ एक्सप्रेसवे पर ये सुविधायें प्रत्येक दिशा में पाँच-पाँच स्थानों पर होनी चाहिए।

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गति नियंत्रण के लिए कैमरे लगाए जाएं

यह भी मांग की गई कि गतिनियंत्रण के लिए भी जल्दी से जल्दी कैमरे लगाये जाने चाहिए और गति उल्लंघन करने वाले वाहनों का चालान होना चाहिए। यमुना एक्सप्रेसवे पर भी ऐसे ही कैमरे लगे हुए हैं, जिनके अनुसार पिछले पांच वर्षों में 2 करोड़ 30 लाख वाहनों ने गति उल्लंघन किया था लेकिन चालान कुल 18 हजार ही हुए। एडीएफ के अनुसार लखनऊ एक्सप्रेसवे को सुरक्षित बनाने के लिए न केवल कैमरे ही लगाये जायें, बल्कि गति उल्लंघन के विरुद्ध प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित हो।

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एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेन्ट सिस्टम के अंतर्गत व्यवस्थाएं प्रस्तावित

1. आपातकाल की स्थिति में एक्सप्रेसवे उपयोगकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों द्वारा कन्ट्रोल सेन्टर से सम्पर्क स्थापित कर सूचना उपलब्ध कराने हेतु 76 इलेक्ट्रॉनिक कॉल बूथ की स्थापना।

2. रियल टाइम डेटा प्राप्त कर एक्सप्रेसवे पर सुचारु एवं सुरक्षित ट्रैफिक प्रबंधन हेतु 50 सी0सी0 टी0वी. उपकरणों की स्थापना।

3. वाहनों के नम्बर प्लेट को रिकॉर्ड करने की क्षमता वाले कैमरों तथा वाहनों की गति मापने के यंत्रों की 10 स्थलों पर स्थापना।

4. एक्सप्रेसवे में 34 स्थलों पर ऑटोमैटिक व्हीकल क्लासिफायर और काउण्टर की स्थापना व संचालन।

5. यात्रा को सुरक्षित व सुगम बनाने हेतु एटीएमएस उपकरणों के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं को मोबाइल ऐप के माध्यम से एक्सप्रेसवे के उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध कराना।

6. एक्सप्रेसवे के तीन कण्ट्रोल सेन्टर स्थलों पर वृहद डिस्प्ले बोर्ड, नेटवर्क मैनेजमेन्ट सिस्टम सहित सेन्ट्रल कम्प्यूटर, सीसी टीवी मॉनिटरिंग सिस्टम एवं कॉल सेन्टर की स्थापना।

7. आगरा एवं लखनऊ के निकट स्थित टोल प्लाज़ा पर एटीएमएस कार्यों के माध्यम से सड़क सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदर्शन।

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महत्वपूर्ण सुझाव

ए0डी0एफ0 द्वारा सुझाव दिया गया है कि एक्सप्रेसवे पर चलने वालों का इन्श्योरेन्स कवर हो, जिसका शुल्क टोल के साथ लिया जा सकता है। इस मांग का समर्थन ए0डी0एफ0 के अध्यक्ष पूरन डावर द्वारा भी किया गया। वाहनों की ओवरस्पीडिंग को रोकने, एम्बुलेन्स व ट्रॉमा सेन्टर की प्रभावी व्यवस्था व जनसुविधाओं को तुरन्त उपलब्ध कराये जाने की मांग भी ए0डी0एफ0 की ओर से की गई ताकि एक्सप्रेसवे पर हादसों में मानव जीवन बच सके।

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