
एकल रुप में भी मिल सकेगा देशभर के निषाद समाज के लोगों को राष्ट्रीय मछुआ आवास कल्याण योजना का लाभ
आगरा। अब देशभर के निषाद समाज के लोगों को राष्ट्रीय मछुआ आवास कल्याण योजना का लाभ क्लस्टर में नहीं बल्कि एकल रुप में भी मिल सकेगा। ये संभव हुआ है आगरा के सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल के सुझाव से, जिन्होंने मंगलवार को केरल के सांसद के सवाल पर राष्ट्रीय मछुआ आवास कल्याण योजना पर लोकसभा में बहस में हिस्सा लेते हुए इस योजना को क्लस्टर से मुक्ति दिलाने और निषाद समाज को सम्मान दिलाने के लिए नाम बदलने की मांग की, जिसे लोकसभा में ही केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने स्वीकृति प्रदान कर दी।
अब निषाद समाज के पात्र व्यक्तियों को हर जिले में राष्ट्रीय मछुआ आवास कल्याण योजना में मकान मिल सकेंगे। पहले इस योजना के अंतर्गत एक ही गांव में प्रति जिले में 20 मकान इस योजना के अंतर्गत मिलते थे, जिसके चलते इस योजना का लाभ पूरे जिले के लोगों को नहीं मिल पाता था। लोकसभा में जब केरल के एमपी एन के प्रेमाचंद्रन ने इस योजना में बदलाव के लिए सवाल उठाया तो इस मुद्दे पर बहस हुयी। इस बहस में हिस्सा लेते हुए यूपी के पूर्व पशुपालन, लघु सिंचाई और मत्स्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने इस योजना के मूल तत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वे प्रदेश के कैबिनेट मंत्री थे तब यूपी के 12 जिले ऐसे थे जहां इस योजना के पात्र व्यक्तियों को टोटा था। इसलिए इस योजना को क्लस्टर में न बनाकर जिले में पात्र व्यक्तियों को चयनित किया जाए।
सांसद बघेल ने इस योजना के नाम में बदलाव का सुझाव देते हुए कहा कि यूपी में मछुआ शब्द को निषाद समाज के लोग ठीक नहीं मानते हैं, इसलिए इस योजना का नाम बदलकर राष्ट्रीय निषादराज गोहा या श्रीराम को वनवास के दौरान सरयू नदी पार कराने वाले निषादराज केवट के नाम पर रख दिया जाए, जिससे निषाद समाज को योजना के लाभ के साथ सम्मान भी मिल सके।
जब आगरा के सांसद ने ये सुझाव लोकसभा में रखे तो सदन में मौजूद केन्द्रीय डेयरी, पशुपालन व मत्स्य मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निर्देश पर जवाब देते हुए कहा कि वे अनुभवी सांसद और यूपी के पशुपालन, मत्स्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल से सहमत हैं, इसलिए लोकसभा में ही ये आश्वासन दे रहे हैं, कि अब इस योजना में क्लस्टर शब्द नहीं होगा, किसी भी जिले में एक भी पात्र व्यक्ति किसी एक गांव में मिलेगा उसे भी इस योजना का लाभ मिलेगा।
आपको बता दें कि मत्स्य पालन कर गुजर-बसर करने वाले गरीब मछुआरों के लिए केंद्र सरकार ये राष्ट्रीय मछुआ आवास कल्याण योजना संचालित की है, जिसके अंतर्गत गरीब मछुआरों को एक लाख बीस हजार रुपये की धनराशि दी जाती है, जिसके तहत एक जिले में 20 आवास देने का प्रावधान है। इस योजना में पहले क्लस्टर शब्द जुड़ा हुआ था जिसके चलते ये योजना एक जिले के किसी एक गांव में ही दी जाती थी। अगर किसी गांव में 20 पात्र मछुआरे नहीं मिलते थे तो योजना का पैसा लैप्स होकर वापस चला जाता था। सदन में जब इस योजना की धनराशि बढ़ाने और प्रत्येक जिले में आवासों की संख्या बढ़ाने के लिए बहस चल रही थी जिसमें भाग लेते हुए आगरा के सांसद ने इस योजना की जटिलताओं को सदन के समक्ष रखा। जिस पर विभागीय मंत्री ने अपनी सहमति जताते हुए अब क्लस्टर यानि एक ही गांव में इस योजना को साकार करने की बाध्यता को हटाने की स्वीकृति प्रदान की है, जबकि आमतौर पर मंत्री इस तरह की स्वीकृति का आश्वासन नहीं देते हैं। सांसद बघेल इससे पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राष्ट्रवाद के साथ ही आगरा में इण्टरनेशनल एयरपोर्ट, इंटरनेशनल स्टेडियम, और बैराज निर्माण का मुद्दा भी उठा चुके हैं, इसके साथ ही वे सेंट्रल यूनिवर्सिटी बिल पर बोलते समय आगरा कालेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी और डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि को सेंट्रल का दर्जा देने की मांग उठा चुके हैं।
Published on:
16 Jul 2019 10:09 pm
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